मप्र के राजनीतिक व प्रशासनिक भविष्य को लेकर नया व निणार्यक सप्ताह आज शुरू हो गया है। इस के शुरूआती दिनों में नये मुख्य सचिव या 'केयरटेकर सीएस' की नियुक्ति होनी है तथा सप्ताह के आखिरी दिन राज्य की नयी सरकार व नये मुख्यमंत्री की तस्वीर साफ होने वाली है। 

दोनों ही मामलों में संबंधित पक्ष अपनी अपनी तैयारियों को अंजाम दे रहे हैं। चुनाव आयोग मतगणना की तैयारी व मतगणना के दिन की तमाम व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहा है, वहीं उसे अगले दो दिन में राज्य के नये मुख्यसचिव को लेकर भी फैसला करना है। हालांकि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर यह फैसला मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के जरिये दिल्ली में चुनाव आयोग तक जाएगा और इसी सीढी से उतरता हुआ सरकार तक पहुंचेगा।

जानकार सूत्रों का कहना है कि कल शाम तक यह निर्णय हो सकता है। मौजूदा मुख्यसचिव इकबाल सिंह बैंस को यदि फिर कुछ दिन की सेवावृद्धि का प्रस्ताव आता है तो इसमें केंद्र की मंजूरी भी जरूरी होगी। यदि नये मुख्यसचिव के लिये बात आगे बढती है तो वरिष्ठता के आधार पर निर्वाचन आयोग द्वारा निर्णय होगा। 

सूत्रों का कहना है कि सरकार अभी बैंस को ही कुछ दिन पद पर रखना चाहती है ताकि पद संभालने के दो दिन बाद ही मतगणना के वक्त नये मुख्यसचिव को दिक्कतें न हों। हालांकि बैंस को पहले भी दो सेवावृध्दि मिल चुकी है। अब उनके नये कार्यकाल का फैसला केंद्र सरकार व आयोग के जरिये होगा। उनका कार्यकाल 30 नवंबर तक है। 

वैसे, वरिष्ठता के आधार पर नया मुख्य सचिव नियुक्त करने का भी विकल्प है। सरकार पैनल भेजकर निर्णय आयोग पर छोड़ सकती है। वरिष्ठता के आधार पर 1988 बैच की वीरा राणा सबसे ऊपर हैं। उनके बाद मप्र में वरिष्ठता क्रम में मोहम्मद सुलेमान और विनोद कुमार का नाम आता है।