मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों (सांसदों) का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया, लेकिन विधानसभा सत्र के पहले ही दिन एक बडा विवाद सामने आ गयाा। ये विवाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर को स्पीकर की कुर्सी के पीछे से हटाने को लेकर हुआ। कांग्रेसियों ने अब इस तस्वीर को वापस लगाए जाने को लेकर मुहिम छेड़ दी है।

दरअसल, विधानसभा भवन में स्पीकर की कुर्सी के पीछे जहां पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर लगी थी, वहीं आज संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो लगाई गई। इसे लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है।

विधानसभा अध्यक्ष के दाहिनी ओर अभी भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्र लगाया गया है, जबकि बाईं ओर अब पं. नेहरू की जगह डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगाई गई है। इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस ने पंडित नेहरू की तस्वीर दोबारा लगाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि कांग्रेस विधायक उनकी तस्वीर दोबारा लगाएंगे।

पं. नेहरू की तस्वीर हटाए जाने को लेकर कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का का कहना है, कि सदन से जवाहरलाल नेहरु की फ़ोटो हटाना अफ़सोसजनक है। जयवर्धन सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए थे , पाकिस्तान के क्या हालत हो गई है सबको पता है। भारत लोकतंत्र की नींव मजबूत जवाहरलाल नेहरू के कारण हुई है। भाजपा या जिस किसी ने नेहरू की फोटो हटाई है वह गलत है। मैं प्रोटेम स्पीकर से ऐसी हल्की राजनीति को लेकर चर्चा करूँगा।

कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसे लेकर सवाल उठाएं हैं, कांग्रेसियों का कहना है, कि मध्य प्रदेश विधानसभा से राष्ट्रनिर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू की यह पेंटिंग हटा दी गई। इस तरह भाजपा ने अपने नैतिक पतन का एक और नग्न नृत्य किया। अपने पाप को छुपाने के लिए बाबा साहेब की पेंटिंग लगाई। अगर नियत साफ़ होती तो बाबा साहेब को राष्ट्रपिता और राष्ट्रनिर्माता के बीच में या उचित सम्मानित स्थान पर भी लगा सकते थे।