कोविड काल में दो साल स्थगित रहे इज्तिमा का आयोजन सीमित रूप में  हुआ था। इस साल यह विश्वस्तरीय मजहबी समागम अपने पूरे मजमे के साथ आयोजित किया जाएगा। आलमी तब्लीगी इज्तिमा को लेकर ईंटखेड़ी के घासीपुरा स्थित इज्तिमागाह पर तैयारियों का दौर जारी है और अधिकांश कामों को पूरा कर लिया गया है। जबकि कई नीतिगत निर्णय अभी लिए जाना बाकी हैं। इनमें सामूहिक निकाह पर फैसला होना बाकी है।

आमतौर पर नवंबर माह में आयोजित होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा आयोजन को इस बार विधानसभा चुनावों के चलते एक माह आगे बढ़ा दिया गया है। यह आयोजन अब आठ दिसंबर से शुरू होगा और 11 दिसंबर को सामूहिक दुआ के साथ इसका समापन होगा। आलमी तब्लीगी इज्तिमा में इस बार दुनियाभर की जमातों की आमद होगी। जिसमें अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, जकार्ता, बंगलादेश, अमेरिका, रूस आदि देशों की जमातें शामिल होंगी।

पाकिस्तान को इस बार भी बुलावा नहीं
इस बार भी पाकिस्तान की जमातों को नहीं बुलाया गया है। हिंदुस्तान के सभी प्रदेशों के जमाती भी यहां पहुंचेंगे। तीन दिन चलने वाली मजहबी तकरीरों के दौर के बीच उलेमा लोगों को दुनिया में रखे जाने वाले अपने किरदार और अपने अल्लाह के लिए वफादारी की बातें सिखाएंगे। आमतौर पर उलेमाओं की तकरीरों में इस्लाम के छह मुख्य बिंदुओं पर केन्द्रित बात ही की जाती है। जिसको लेकर यह भी कहा जाता है कि यहां सिर्फ जमीन से नीचे और आसमान के ऊपर की बात की जाती है, जबकि दुनियावी बातों का जिक्र इस मजमे में नहीं किया जाता।

तैयारियां जोरों परः ईंटखेडी स्थित इज्तिमागाह पर आयोजन की तैयारियों का दौर तेज है। पिछले कई दिनों से यहां वालेंटियर्स पहुंचकर जमीन समतलीकरण, पांडाल लगाने, वुजूखाने और बाथरूम के लिए पाइप लाइन बिछाने, बिजली के खंभे खड़े करने आदि के कामों पूरा करने में जुटे हैं। इज्तिमा प्रबंधन कमेटी का कहना है कि अब तक करीब 70 फीसदी से ज्यादा काम निपट चुका है, जबकि नगर निगम, पीडब्ल्युडी, विद्युत मंडल आदि सरकारी विभागों से जुड़े कुछ काम बाकी हैं, जिनमें अब तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।