मध्यप्रदेश में आने वाले कुछ हफ्तों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे है, वैसे-वैसे दल-बदल का मुद्दा गर्माता जा रहा है। चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। असंतुष्ट या तो किसी और पार्टी का हाथ थाम रहे हैं या फिर निर्दलीय ही मैदान में कूद पड़े हैं।
ताजा मामला बीजेपी से जुड़ा है, जिसने पार्टी की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं। आष्टा और सीहोर विस में नाराज नेताओं को मनाने में भाजपा नाकामयाब हो रही है। अब भाजपा का एक ओर विकेट चटक गया जब वरिष्ठ नेता जसपाल सिंह आरोरा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जसपाल अरोरा को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।
अरोरा ने इससे पहले अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले 20 सालों से मैं पार्टी की सेवा कर रहा हूं। सीएम शिवराज सिंह मुझे भाजपा में ले गए थे। लेकिन न ही मेरे को विधायक का टिकट मिला और न ही समर्थकों को कोई पद मिला। मेरे समर्थकों को कार्यकारिणी में भी जगह नहीं मिली। न ही भाजपा ने उन्हें मंडल अध्यक्ष बनाया न ही बूथ की जिम्मेदारी दी। इससे आहत होकर मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा है।
नेता जसपाल सिंह आरोरा की सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गई जिसमें लिखा गया मंगलवार सुबह 9 बजे कमलनाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता लूंगा।
बीजेपी के कई और भी ऐसे नेता हैं, जिनको मनाने में पार्टी विफल रही है। आष्टा में भी भाजपा विधायक रघुनाथ मालवीय को अभी तक मना नहीं पाई है वह सोमवार सुबह नामांकन फार्म जमा कर चुके है। इससे पहले कैलाश बगाना भी भाजपा के बैनर तले अपना पर्चा भर चुके है। अब देखना होगा कि आखिरकर भाजपा चुनाव से पहले इन रूठे नेताओं को कैसे मना पाती है। यदि ये नेता नहीं माने तो भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है।