ठंड के शुरू होते ही रेल परिचालन में मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर ठंड के इस सीजन में रेल पटरियों के टूटने व फैक्चर होने का खतरा बढ़ा है। इस सीजन में पहली बार मंगलवार रात को भोपाल स्टेशन के पास रेल पटरी टूट गई। जिसके कारण नई दिल्ली-चेन्नई रेल के डाउन ट्रैक पर रात 11 बजे तक रेल आवागमन बंद रहा। पटरी को रात करीब नौ बजे टूटा हुआ पाया था जिसे ठीक करने में रात के 11 बजे गए थे। तब तक भोपाल रेलवे स्टेशन पर गोवा व एपी एक्सप्रेस समेत पांच ट्रेनों को रोकना पड़ा था जबकि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर भोपाल व रेवांचल एक्सप्रेस को रोका था। इसके अलावा भी मिसरोद, मंडीदीप और औबेदुल्लागंज में ट्रेनों को रोका गया था। हजारों यात्री परेशान हुए थे।

निगरानी बढ़ाने से मिली सफलता, संभावित रेल हादसा टला: रेलवे ने भोपाल रेल मंडल में पटरियों व ट्रैक की निगरानी बढ़ा दी है। हर वर्ष यह निगरानी बढ़ाई जाती है, इस वर्ष भी बढ़ाई है। इसका मुख्य मकसद ही ठंड में टूटी व क्रैक हुई पटरियों की पहचान ट्रेनों के गुजरने से पहले करनी है। भोपाल के पास मंगलवार रात को गश्त कर रहे रेलकर्मियों ने यही किया। टूटी पटरी पर कोई ट्रेन प्रवेश करें, उसके पहले ही रेलकर्मियों ने उसे देख लिया और ट्रेनों को रुकवा लिया। इस तरह बड़ा संभावित रेल हादसा टल गया।

उल्लेखनीय है कि ठंड में रेलवे निगरानी करने की तैयारियों को पक्का करता है। एक पटरी पर दो ट्रैकमैनों की गश्त कराने के साथ- साथ अब गश्त की निगरानी भी की जाने लगी है । यह निगरानी इसलिए की जा रही है ताकि ठंड में टूटने वाली पटरियों को उस पर से ट्रेनें गुजरने से पहले ही देखा जा सके। इस तरह हादसा रोकने में मदद मिलेगी। यदि टूटी हुई पटरी पर ट्रेन ने प्रवेश कर लिया तो रेल हादसा तय है और बड़ी जनहानि से भी इंकार नहीं किया जा सकता। 

वैसे तो हर वर्ष ठंड के दिनों में रेलवे अपने ट्रैक के निगरानी में अतिरिक्त सावधानी बरतता है लेकिन इस वर्ष अधिकारियों को भी लगा दिया गया है। प्रत्येक घंटे की पल-पल की रिपोर्ट मांगी जा रही है। ट्रैकमैन ड्यूटी पर है या नहीं, इसे भी देखा जा रहा है। किसी भी स्तर पर कमियां न रहे, इसकी समीक्षा स्वयं डीआरएम सौरभ बंदोपाध्याय कर रहे हैं। वह स्वयं भी रात्रिकालीन औचक निरीक्षण कर रहे हैं। चूंकि ट्रेन जिन पटरियों पर दौड़ती है उनका सुरक्षित होना बहुत जरूरी है। रेलवे के अधिकारी इसको लेकर हर स्तर पर सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ठंड में भी पटरी नहीं टूट रही है और न ही उनमें फेक्कर आ रहा है। वहीं आता भी है तो उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।