बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी सुनील ओझा का बुधवार को दिल्ली में निधन हो गया। गड़ौली धाम में राम कथा के दौरान डेंगू होने पर उन्हें वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया। जहां 29 नवंबर बुधवार को सुबह उनका निधन हो गया।

सुनील ओझा निधन पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई राजनेताओं  ने शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी  सुनील ओझा के निधन को भाजपा के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

सीएम शिवराज  ने अपने X हैंडल पर लिखा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बिहार भाजपा के सह-प्रभारी श्री सुनील ओझा जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। सुनील जी का निधन भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूँ। ।।ॐ शांति।।

सुनील ओझा मूल रूप से गुजरात के भावनगर जिले के रहने वाले थे और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में से एक माना जाता था। सुनील ओझा भावनगर दक्षिण से बीजेपी विधायक भी रह चुके हैं। कुछ महीने पहले उन्हें उत्तर प्रदेश से हटाकर बिहार का सह प्रभार दिया गया था।

सुनील ओझा को पीएम मोदी का 'मिस्टर डिपेंडेबल' कहा जाता था। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना पहला चुनाव 2002 में लड़ा था, तब राजकोट में उनके चुनाव प्रभारी सुनील ओझा थे। यहीं से ओझा ने अपनी बुद्धिमत्ता और मेहनत से मिस्टर डिपेंडेबल की छवि बनाई।