पांच साल पहले विधानसभा चुनावों से बहुमत के बारीक अंतर से छिटकने वाली भाजपा को अब मिले प्रचंड बहुमत की वजहों की अब पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना ने संजीवनी फूंकी है तो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष शर्मा भाजपा के लिए फिर शुभंकर बने हैं। हालांकि हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट बैंक घटने नहीं दिया। 40.89 से घटकर वह 40.40 तक टिका रहा। लेकिन कांग्रेस का वोट शेयर नहीं घटने के बावजूद भाजपा के वोट बैंक में सात फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ। यानि वह 41.03 से बढ़कर 47 के पार जा पहुंचा।
बीते 35 सालों में यह भाजपा का सबसे बड़ा वोट शेयर है। वहीं वीडी शर्मा ने 9 मार्च 2020 को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया और मात्र 11 दिनों के भीतर ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोग से भाजपा की सरकार 15 महीनों के निर्वासन के बाद वापस लौट आई। इसके बाद शिवराज और वीडी की जोड़ी ने सिंधिया के साथ मिलकर कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले 27 में से 19 विधायक दिलवाकर भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिलवा दिया। 2023 आते-आते वीडी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष रहते भाजपा 126 से 164 सीटों तक जा पहुंची। इसी के चलते लोग उन्हें भाजपा के शुभंकर के तमगे से नवाज रहे हैं।
उधर मप्र से लेकर छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने मुफ्त रेवड़ियों के वादे में खुद को भाजपा के मुकाबले मीलों आगे रखा। सौ यूनिट तक बिजली माफ दो सौ तक बिजली बिल हाफ की योजना से लेकर किसानों की कर्ज माफी और पांच हार्स पावर तक के बिजली पंपों को मुफ्त बिजली के नारों से लेकर कांग्रेस ने हरेक को पांच सौ रूपए में गैस सिलेंडर जैसी घोषणा की।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना के मुकाबले 15 सौ रूपए प्रति महीने नारी सम्मान योजना में देने के वादे किए लेकिन महिला मतदाताओं या शिवराज की बहनाओं ने अपने भाई की 1250 रूपए महीने की योजना पर यकीन करके कांग्रेस की मुफ्त की रेवडियों को नकार दिया। अब यह शोध का विषय है कि शिवराज की मुफ्त की रेवड़ी ही क्यों चली और छत्तीसगढ़ व राजस्थान में कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों की उससे बड़ी मुफ्त योजनाओं को जनता ने क्यों नकार दिया। या लोगों ने व्यक्ति के बजाए मोदी-शाह की अगुआई में भाजपा के सामूहिक नेतृत्व पर ज्यादा ऐतबार किया।
सीएम पर सस्पेंस जारी
प्रचंड बहुमत के बाद अब मप्र में मुख्यंमंत्री के चेहरे पर सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि शिवराज सिंह चौहान को स्वाभाविक व मजबूत माना जा रहा है लेकिन कुछ अन्य नाम भी चर्चा में आ गये हैं। वहीं भाजपा हाइकमान के रूख पर भी निगाहें हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आज मप्र के लिये पर्यवेक्षक का नाम तय हो सकता है, उसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक होगी तथा नेता का चुनाव होगा।