मध्यप्रदेश पर क़र्ज़ का मामला गुरुवार को विधानसभा में उठा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश पर अब क़र्ज़ करीब चार लाख करोड़ हो गया है। वही एक रिपोर्ट के मुताबिक़ देश का कुल कर्ज चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 2.47 करोड़ डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
अगर माध्याप्रदेश की बात करें तो कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार पर ऋण का बोझ बढ़कर तीन लाख पचासी हजार करोड़ रुपए हो गया है। रावत ने राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश किए गए कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल होते हुए यह बात कही।
उनका कहना था कि प्रति व्यक्ति ऋण भी बढ़कर लगभग 50 हजार करोड़ रुपए हो गया है।
दूसरी ओर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के दावों व हकीकतों के बीच एक सच्चाई यह भी है कि भारत पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है देश का कुल कर्ज चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 2.47 करोड़ डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
इस बीच डॉलर की कीमत में होनी वाली बढ़ोतरी का असर भी पड़ा है, जिसने कर्ज के आंकड़े को बढ़ाने का काम किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कर्ज को लेकर भारत को चेता चुका है कि केंद्र और राज्यों को मिलाकर भारत का सामान्य सरकारी कर्ज मध्यम अवधि में सकल घरेलू उत्पाद के सौ फीसदी से ऊपर पहुंच सकता है। ऐसे में लॉन्ग टर्म में कर्ज चुकाने में दिक्कत पेश आ सकती है।
पहले बीते वित्त वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही में कुल कर्ज 2.34 ट्रिलियन डॉलर या करीब 200 लाख करोड़ रुपये था। इंडियाबॉन्ड्स डॉट कॉम के सह-संस्थापक विशाल गोयनका ने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र और राज्यों पर कर्ज के आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार का कर्ज सितंबर तिमाही में 161.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च तिमाही में 150.4 लाख करोड़ रुपये था।