भोपाल: पन्ना टाइगर ​रिजर्व में कभी पर्यटकों को टाइगर सफारी कराने वाली वत्सला हाथिनी की उम्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने की वजह से उसका नाम 'गिनीज बुक ऑफ  रिकॉर्ड' में दर्द नहीं हो पा रहा है। राज्य वन्य  प्राणी संस्थान जबलपुर ने भी उसकी उम्र की पुष्टि नहीं की है। अलबत्ता फॉरेस्ट के वर्तमान और रिटायर आईएफइस अधिकारी यहै गर्व से दम भरते हैं कि उसकी उम्र 100 साल से अधिक की चुकी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर रहे वन्य प्राणी विशेषज्ञ आर श्रीनिवास मूर्ति बताते हैं कि 'वत्सला' को 1976  में केरल के नीलांबुर वन मंडल से होशंगाबाद प्रोडक्शन वन मंडल में परिवहन के लिए लाया गया था। 1993 में उसे होशंगाबाद के बोरी अभ्यारण से पन्ना टाइगर रिजर्व में लाया गया था।  मूर्ति बताते हैं कि वत्सला के उम्र की आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हो पाई है किंतु हम सभी का मानना है कि वह 100 साल से अधिक उम्र की हो गई है। 

बताया जाता है कि इस दिशा में वर्ष 2007 में पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक शाहबाज अहमद ने वत्सला के जन्म रिकॉर्ड के लिए नीलांबुर फारेस्ट डिवीजन से प्राप्त करने हेतु पत्राचार किया गया था। बाद में अगस्त 2018 में जब शहवाज अहमद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी के पद पर रहते हुए पन्ना दौरे पर आए, उस समय भी वत्सला का जन्म रिकॉर्ड नीलांबुर से मंगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अहमद के सेवानिवृत्त होने के बाद यह मामला ठंडा पड़ गया था। 

पन्ना टाइगर के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से उसकी उम्र का पता करने के लिए पहले राज्य वन्य प्राणी संस्थान जबलपुर और फिर उसके दाढ़ का सैंपल हैदराबाद की फॉरेसिक लैब से भी कोशिश की गई किन्तु निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद से 'गिनीज बुक रिकॉर्ड ' में दर्ज कराने वन विभाग के सभी प्रयास ठंडा पड़ गए हैं।

दो बार प्राण घातक हमले भी हो चुके है

वत्सला पर नर हाथी राजबहादुर ने वर्ष 2003 और 2008 में बार प्राण घातक हमले में किए थे। डॉक्टरों के उपचार और पर प्रबंधन के बेहतर परवरिश के कारण वह आज भी जिंदा है। लेकिन उम्र दराज होने की वजह से 2003 में उसे रिटायर कर दिया गया। अब रिटायर हो चुकी है। पार्क प्रबंधन द्वारा उसकी परिवार के बुजुर्ग की तरह ही देखभाल की जा रही है। अब उसकी दोनों आखों से दिखाई भी नहीं देता। क्षेत्र संचालक बृजेंद्र झा मानते हैं कि  'वत्सला' की उम्र करीब 102 साल है, जो दुनिया में एक रिकॉर्ड है। हालांकि इसके लिखित दस्तावेज नहीं है। 

वत्सला का कुनबा बढ़ा, बेहद शांत है वत्सला, कहलाती है नानी 

खास बात यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी बताते हैं कि वत्सला शुरुआत से ही बेहद शांत हथिनी है। पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों के कुनबे में बच्चों की देखभाल दादी मां की भांति करती है। वत्सला के बच्चें भी देश के अलग-अलग टाइगर रिजर्वों में पर्यटकों का मनोरंजन करते हैं। अपनी इन्ही खासियतों के चलते अन्य हाथियों का भी उससे लगाव है। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि उनका यही प्रयास है कि वत्सला को सबसे उम्रदराज हाथी होने का खिताब मिल जाए।

इनका कहना

वैज्ञानिक तरीके से उसकी उम्र का पता करने के लिए पहले राज्य वन्य प्राणी संस्थान जबलपुर और फिर उसके दाढ़ का सैंपल हैदराबाद की फॉरेसिक लैब से भी कोशिश की गई किन्तु निराशा ही हाथ लगी।

बृजेंद्र झा,  पन्ना टाइगर के फील्ड डायरेक्टर