भोपाल: देश में मृत्यु के प्रकरणों 18 प्रतिशत व्यक्ति वायु प्रदूषण से मर जाते हैं। यह तथ्य आईसीएमआर द्वारा किये गये अध्ययन में सामने आया है। इसका हवाला देकर राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त डा. सुदाम खाड़े ने सभी जिला अस्पतालों के सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन को त्यौहारों में आतिशबाजी एवं पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण पर स्वास्थ्य समस्याओं के नियंत्रण हेतु एडवाईजरी जारी की है।
जारी एडवाईजरी में बताया गया है कि वायु प्रदूषण से व्यक्ति की आंख, कान, गला एवं त्वचा में जलन/खराश, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, छाती में दबाव अथवा दर्द होना, सिर दर्द, चक्कर आना, हाथ-पैरों में शिथिलता जैसे लक्षण होना संभव है। जनसंख्या के संवेदनशील समूह जैसे पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वृध्दजनों, दीर्घकालिक रोगग्रस्त व्यक्तियों, वेन्टीलेशन कमी वाले आवासों के रहवासियों तथा बाहरी कार्यक्षेत्र वाले पुलिसकर्मी, यातायात पुलिस, निर्माणकर्मी, रिक्शा चालक, सडक़ किनारे व्यवसाय करने वाले छोटे व्यापारियों में वायु प्रदूषण के कारण अधिक तीव्र लक्षण उत्पन्न होते हैं।
सभी सीएमएचओ से कहा गया है कि वे वायु जनित स्वास्थ्य समस्याओं का त्वरित एवं समुचित निराकरण सुनिश्चित किया जाये। ऐसे प्रभावित रोगियों के उपचार हेतु ओपीडी विशेषकर जनरल ओपीडी, मेडिसिन, शिशु रोग, ष्वसन रोग, हृदय रोग एवं न्यूरोलाजी ओपीडीस में समस्त आवश्यक संसाधन एवं औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। आपात स्थिति में पभावित रोगियों के परिवहन हेतु स्ट्रेचर, व्हील चेयर, एम्बुलेंस आदि की उचित व्यवस्था समस्त चिकित्सकीय संस्थानों में सुनिश्चित की जाये।
त्यौहारों की आतिशबाजी एवं शीतकाल में वायु के घनत्व से संभावित वायु प्रदूषण जनित रोगों के संबंध में जनसमुदाय में जागरुकता हेतु सूचना प्रसार तंत्रों पर नि:शुल्क प्रसारण स्थानीय प्रशासन के सहयोग से किया जाये। वायु प्रदूषण से कोविड-19 के प्रकरणों में वृध्दि हो सकती है और इसके लिये उचित सतर्कता जनसमुदाय द्वारा बरती जाये। घरों के अंदर लकड़ी, कोयला, गोबर के कण्डे/उपले, केरोसिन का उपयोग भोजन पकाने में नहीं किया जाये। अत्यधिक रुम फ्रेशनर का उपयोग करने से बचा जाये। बंद कमरों में अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली क्वायल को जलाने से बचा जाये।