मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा में रतलाम शहर सीट से बीजेपी विधायक चैतन्य कश्यप ने हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान वेतन, भत्ता और पेंशन त्यागने की बात कही थी। चैतन्य कश्यप ने किसी प्रकार की सैलरी, भत्ते और पेंशन लेने से इनकार कर दिया था। अब इसे लेकर बीजेपी की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती का बयान सामने आया है।

 

उमा भारती ने अपने X हैंडल पर पोस्ट शेयर करके कहा है कि हाल ही में मंत्री बने तथा रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चैतन्य कश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की है। अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ़ लिखी थी की वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जो की साल भर का क़रीब 12 लाख होता हैं।

 

उमाभारती ने कहा, 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं । चैतन्य कश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियों की शिक्षा पर खर्च कर सकते हैं।

 

उमा भारती ने इस बाक पर भी प्रकाश डाला कि हमे यह याद रखना पड़ेगा की सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और ना वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं। एक बार सांसद वरुण गाँधी ने कहा था की सांसदों को तनखा एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए । वरुण गाँधी ऐसा कर सकते है क्यूँकि वो हज़ारो करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है।

 

उमा भारती का कहना है, कि अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए। अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन कश्यप जैसे पूँजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की तनखा एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए।

 

बता दें चैतन्य कश्यप मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायक हैं। उनके पास करीब 294 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन पर बैंक का 13 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। बीजेपी के टिकट पर उज्जैन संभाग की रतलाम शहर सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे चैतन्य कश्यप अब मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों की लिस्ट में टॉप पर हैं। अब चैतन्य कश्यप एक विधायक को मिलने वाली सभी सुविधाएं जैसे सैलरी, पेंशन और भत्ते को त्यागने की बात कहकर सुर्ख़ियों में बने हुए हैं।