एक तरफ देश में चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन पर भी सियासत तूल पकड़ती जा रही है। देश की राजनीति एक बार फिर धीरे-धीरे राम मंदिर की ओर बढ़ती नजर आ रही है। राम मंदिर के पक्ष और विपक्ष में आए दिन नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। ग्वालियर में सलमान खुर्शीद के बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार किया है।
दरअसल, राम मंदिर उद्घाटन को लेकर सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान सामने आया था। जिसमें उन्होंने कहा कि राम मंदिर एकमात्र बीजेपी का मंदिर नहीं है। तो फिर वहां सिर्फ बीजेपी नेताओं को ही क्यों बुलाया जाता है? इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि "राम मंदिर स्थापित करने का संकल्प मेरी दादी ने उस ज़माने में लिया था जब इस पूर्ण विचारधारा का श्री गणेश हुआ था और ये केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संभव हो पाया है... आज कुछ लोगों को लग रहा है कि वे भी इसमें शामिल होना चाहते हैं तो उनका स्वागत है।
सिंधिया ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी में रहकर भी 370 पूर्ण रूप से खारिज करने के पक्ष में बोला था। देशहित सर्वोपरि होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जो करके दिखाया है वे किसी करिश्मे से कम नहीं है। धारा 370 हो, भारत के दुश्मनों को उनकी सही जगह दिखाने की बात हो, विश्व मंच पर भारतीय तिरंगे को लहराने की बात हो, तीन तलाक को समूल ख़त्म करने की बात हो, राम मंदिर स्थापना की बात हो।
अगर सलमान खुर्शीद जी और अन्य दलों के पास इतना ही सच्चा दिल था तो अपने कार्यकाल में राम मंदिर को लेकर उनके मुंह से एक भी शब्द क्यों नहीं निकला। उनके कार्यकाल में राम मंदिर की स्थापना के मुद्दे पर कोई काम क्यों नहीं हुआ?