मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल को लेकर सुगबुगाहट का दौर जारी है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कवायद जोरों पर हैं। दो उपमुख्यमंत्री बनाये जा चुके हैं। अब मंत्रिमंडल में 18 विधायकों को बर्थ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि CM मोहन यादव की कैबिनेट में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ युवा जोश और अनुभव को वरीयता दे जाएगी लेकिन अटकलों के दौर में सबसे ज्यादा बेचैनी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे में देखी जा रही है।
अगर शिवराज कैबिनेट की बात की जाये तो इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों बड़ी भूमिका में थे। इसका कारण सिंधिया द्वारा दलबदल कर भाजपा सरकार को फिर सत्ता में लाना था। इसके चलते ही सिंधिया ने अपने 19 समर्थकों को कैबिनेट में शामिल करवा लिया था।
हालांकि इन 19 समर्थकों में सात लोग चुनाव हार चुके हैं और चार के टिकट कटे थे। ऐसे में सिंधिया खेमे से जीतकर आये विधायकों में बेचैनी है कि इस बार किसे और कैसे मौका मिलेगा। सिंधिया समर्थकों में सबसे मजबूत दावा तुलसी सिलावट का है। वहीं उनके एक और समर्थक गोविन्द सिंह राजपूत की कैबिनेट बर्थ मुश्किल में मानी जा रही है।
ऐसा भी माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन से चार समर्थकों को मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है। इसमें ग्वालियर से प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदौर से तुलसीराम सिलावट के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। वहीं प्रदेश में एक मात्र सिख विधायक हरदीप सिंह डंग का भी मंत्रिमंडल में शामिल होना तय माना जा रहा है।
हालांकि मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल होंगे, इसका अंतिम निर्णय फिलहाल दिल्ली में ही होगा। इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की लंबी मुलाकात बंद कमरे में हुई है।