मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रदेश में बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार कर कांग्रेस ने अपनी युवा बिग्रेड को नेतृत्व की कमान सौंपी है। इस बदलाव के तहत प्रदेश कांग्रेस की कमान जीतू पटवारी को सौंपी गई है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार को बनाया गया है।  

इंदौर जिले की राऊ सीट से विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी आलाकमान द्वारा जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना प्रदेश में कांग्रेस की सियासत में बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी जोश है, उत्साह है। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष को घेरना शुरू कर दिया है।

पटवारी की नियुक्ति के साथ ही भाजपा ने सबसे बड़ा निशाना उनकी हाल के विधानसभा चुनाव में हार को लेकर लगाया है। हालांकि यह हार सियासी हलकों में अप्रत्यशित ही थी क्योंकि जीतू अपनी विधानसभा में न केवल सक्रिय थे बल्कि प्रदेश स्तर पर भी शिवराज सरकार के खिलाफ जमीनी संघर्ष में दम ठोंक रहे थे। किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर पटवारी बेहद मुखर थे।

ऐसे में पटवारी की हार को मुद्दा बना भाजपा कांग्रेस के इस निर्णय पर सवाल उठा रही है। प्रदेश भाजपा ने तो 'हारे के सहारे' पंचलाइन के साथ कांग्रेस और पटवारी पर हमला भी बोलना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया में भी यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या हाल ही में विधानसभा चुनाव हार चुके नेता को प्रदेश की कमान देना एक समझदारी भरा फैसला है?


भाजपा सवाल जरूर उठा रही है लेकिन हार के बाद भी भरोसे पर खरे उतरने वाले पटवारी अकेले नेता नहीं हैं। मध्यप्रदेश के साथ जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे उनमें तेलंगाना में कांग्रेस ने जो बड़ी जीत हासिल की है उसके शिल्पकार रेवंथ रेड्डी को भी हार के बाद ही प्रदेश की कमान सौंपी गई थी।

रेवंथ रेड्डी 2017-18 में दिल्ली में पार्टी नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हुए थे। 2018 के विधानसभा चुनाव वे बीआरएस उम्मीदवार से हार गए थे। इसके बाद भी जीतू पटवारी की ही तरह कांग्रेस में जूनियर होने के बावजूद रेड्डी को 2021 में तेलंगाना पीसीसी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।  राज्य कांग्रेस इकाई के कई वरिष्ठों में नाराज़गी भरी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच कांग्रेस की किस्मत को पुनर्जीवित करने का अविश्वसनीय कार्य जिस तरह  रेवंत रेड्डी ने बखूबी पूरा भी किया। उसका नतीजा हमारे सामने है।

ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जीतू पटवारी भी तेलंगाना की तरह की मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए करिश्माई साबित होंगे। जिस तरह से रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा माहौल बनाकर इतिहास रच दिया। ठीक ऐसी ही उम्मीद जीतू पटवारी से भी की जा रही है, कि वे एक बार फिर से पार्टी में जान फूंकने का काम करेंगे और फिर से एक बार पार्टी को नए आयाम, नई उम्मीदें देकर संगठित करने का काम करेंगे।

पटवारी के सामने गुटीय संतुलन को समाप्त कर संगठन को खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। यही नहीं पटवारी के पास वक़्त भी ज्यादा नहीं क्योंकि उनकी पहली अग्निपरीक्षा तो लोकसभा चुनाव में ही होनी है। पार्टी आलाकमान ने उन पर जो भरोसा जताया है उसके बाद यही कहा जा रहा है कि क्या पटवारी कांग्रेस के लिए हार कर जीतने वाले बाज़ीगर साबित होंगे?

जो भी हो फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जीतू पटवारी 19 दिसंबर को कार्यभार संभालने राजधानी भोपाल आ रहे हैं। पदभार ग्रहण करने से पहले वह उज्जैन पहुंचेंगे और बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी 19 दिसंबर को सुबह 9 बजे इंदौर से उज्जैन पहुंचेंगे, जहां वे बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे। उज्जैन के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से  मुलाकात कर वे भोपाल रवाना होंगे।