मध्य प्रदेश के नये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शपथ ग्रहण के बाद से ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. शपथ लेने के बाद वह अपने गृहनगर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचे. जहां उज्जैन की जनता ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया. हालांकि, कल पहली बार सीएम यादव ने उज्जैन की गीता कॉलोनी स्थित अपने घर पर रात गुजार कर दशकों पुराने मिथक को तोड़ दिया.
दरअसल, महाकाल की नगरी उज्जैन के बारे में प्राचीन काल से ही यह मान्यता है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर कोई भी मुख्यमंत्री या राज्यपाल उज्जैन की नगर सीमा के भीतर रात गुजारने की हिम्मत नहीं करते है. अगर ऐसा होता हैं तो उन्हें इस अपराध की सजा भुगतनी पड़ती है.
कहा तो यह भी जाता है कि यदि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर कोई भी मुख्यमंत्री या राज्यपाल महाकाल की नगरी में रात्रि विश्राम करते है तो उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ता है, क्योंकि उज्जैन के राजा तो बाबा महाकाल ही हैं. हालांकि, इस मिथक पर सीएम यादव ने कहा कि मैं उज्जैन का बेटा हूं और मैं यहां रुक सकता हूं. मैं मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि महाकाल के सेवक के रूप में काम कर रहा हूं.
सीएम यादव ने आगे इस मिथक के पीछे की कहानी भी बताई. उन्होंने कहा कि सिंधिया महाराज ने एक राजनीतिक रणनीति के तहत कोई आक्रमण ना हो और अपनी राजधानी को ग्वालियर ले जाना था, इसलिए यह मिथक गढ़ा था. राजा महाकाल तो पूरे ब्रह्मांड के राजा हैं. अगर उन्हें नुकसान ही करना होगा तो कहीं भी कर सकते हैं. नगर निगम सीमा से क्या लेना देना है.
उन्होंने आगे कहा, भगवान महाकाल केवल नगर निगम सीमा के राजा थोड़ी हैं, वह पूरे ब्रह्मांड के राजा हैं. भगवान महाकाल की इच्छा थी कि मुझे उन्होंने सीएम बनाया और कहा कि तुम यहां मिथक तोड़ो. राजनीतिक रणनीति के हिसाब से जाने-अनजाने अपन भी कहते थे कि राजा रात नहीं रुकेगा. अरे राजा तो बाबा महाकाल हैं, हम तो उनके बेटे हैं. क्यों नहीं रात रुकेंगे. बाबा महाकाल के बाल बच्चे हम हैं. बाबा महाकाल नगर निगम तक ही रहेंगे यह कौन सी बात है.
सीएम यादव बोले, बाबा महाकाल ने टेढ़ी निगाह कर ली तो ब्रह्मांड में कहां कोई बच सकता है. बाबा तो जन्म देने वाले हैं, आशीर्वाद देने वाले हैं. इसलिए, बाबा ने कहा कि सीएम उज्जैन से ही देता हूं तो झंझट ही खत्म हो जायेगा.