भोपाल: नामीबिया से चीतों को भारत लाने वाले विशेष विमान की तस्वीर सामने आई है, जिसमें चीतों की खूबसूरत पेंटिंग की गई है। विमान कंपनी ने इस फ्लाइट को विशेष फ्लैग नंबर 118 दिया है। कंपनी दुनिया में पहली बार चीतों को शिफ्ट करने के लिए फ्लाइट का संचालन कर रही है, ऐसे में यह उनके लिए एक ऐतिहासिक पल है।
इस विमान में 8 चीतों को भारत लाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन्हें 17 सितंबर को कूनो अभयारण्य में छोड़ेंगे। विमान चीतों को लेने के लिए पहुंच चुका है, नामीबिया में भारतीय दूतावास ने इस विमान की तस्वीर ट्वीट की है।
India welcomes back the Big Cats!#CheetahIsBack https://t.co/362jAYAxIS
— Vinod Tawde (@TawdeVinod) September 15, 2022
विशेष विमान बी 747 जंबो जेट 16 सितंबर शुक्रवार को नामीबिया से 8 चीतों को लेकर भारत के लिए उड़ान भरेगा। विमान कंपनी के मुताबिक, रात के समय में उड़ान भरने से चीतों को पहुंचाने में आसानी होगी। यह उड़ान शनिवार 17 सितंबर की सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी और फिर चीतों को हेलीकाप्टर के द्वारा कूनो अभयारण्य ले जाया जाएगा।
चीतों को भारत लाने वाले बोइंग 747 पैसेंजर जंबो जेट को इस तरह परिवर्तित किया गया है कि उसमें पिंजरों को आसानी से रखा जा सके। पिंजरों के बीच इतनी जगह होगी कि उड़ान के दौरान पशु चिकित्सक आसानी से चीतों पर नजर रख सकें। यह विमान 16 घंटे तक बिना रुके उड़ान भर सकता है, इसी वजह से यह नामीबिया से उड़ाने भरने के बाद सीधे जयपुर में उतरेगा।
जानिए कुछ जरुरी बाते-
* एक बोइंग 747-400 विमान उन्हें नामीबिया की राजधानी विंडहोक से उड़ाएगा। उन्हें मुख्य केबिन में पिंजरों के अंदर रखा जाएगा।
* उड़ान के दौरान पशु चिकित्सकों की उन तक पूरी पहुंच होगी। ईंधन भरने के लिए कोई विराम नहीं होगा और उन्हें कोई भोजन नहीं दिया जाएगा ताकि उन्हें मिचली (उल्टी) न आए।
* शनिवार सुबह वे जयपुर पहुंचेंगे। जयपुर से उन्हें हेलिकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क ले जाया जाएगा।
* आठ चीतों के समूह में 5 मादा और 3 नर होते हैं।
* मादा चीतों की उम्र 2 से 5 साल के बीच होती है और नर चीतों की उम्र 4.5 साल से 5.5 साल के बीच होती है।
* 3 नर चीतों में दो भाई शामिल हैं। जो जुलाई 2021 से नामीबिया में चीता संरक्षण कोष के रिजर्व में रह रहे हैं।
* दूसरे नर चीता का जन्म 2018 में दूसरे रिजर्व में हुआ था।
* एक मादा चीता दक्षिणपूर्वी नामीबिया में गोबाबिस के निकट एक जलकुंड में पाई गई थी। उस समय वे कुपोषित थे और उन्हें 2020 में चीता संरक्षण कोष के रिजर्व में लाया गया था। ऐसा माना जाता था कि उनकी मां की मौत उनके पाए जाने से कुछ हफ्ते पहले जंगल की आग में हो गई थी।
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