मोदी सरकार को नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत हासिल हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया में कोई गलती नहीं है, आर्थिक फैसले को पलटा नहीं जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कोर्ट की संविधान पीठ ने 4-1 बहुमत से केंद्र सरकार के छह साल पहले 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा। इसी के साथ कोर्ट ने नोटबंदी से जुडी सभी 58 याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है। पीठ ने कहा कि नोटबंदी का फैसला लेते समय अपनाई गई प्रक्रिया में कोई कमी नहीं थी, इसलिए उस अधिसूचना को रद्द करने की कोई जरूरत नहीं है। 

फैसले में ये भी कहा गया कि कोर्ट आर्थिक नीति पर बहुत सीमित दखल दे सकता है। जजों ने कहा कि केंद्र और आरबीआई के बीच (नोटबंदी पर) 6 महीने तक चर्चा की गई थी, इसलिए निर्णय प्रक्रिया को गलत नहीं का जा सकता। 

नोटबंदी को लेकर जस्टिस बीवी नागरत्ना की राय अलग दिखाई दी। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार के इशारे पर नोटों की सभी सीरीज का विमुद्रीकरण बैंक के विमुद्रीकरण की तुलना में कहीं अधिक गंभीर मुद्दा है। आरबीआई ने स्वतंत्र दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया और केवल नोटबंदी के लिए केंद्र की इच्छा को मंजूरी दी।