भोपाल: राज्य सरकार ने दस साल पहले खनिज विभाग के अंतर्गत बने जिला खनिज प्रतिष्ठान नियमों में बदलाव कर दिया है तथा अब उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 60 के बजाये 70 प्रतिशत राशि व्यय की जा सकेगी जिसमें पेयजल, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृध्द एवं दिव्यांगजन कल्याण, कौशल विकास व आजीविका सृजन, स्वच्छता, आवास, कृषि, पशुपालन शामिल हैं जबकि अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में शेष 30 प्रतिशत राशि व्यय की जा सकेगी जिसमें सडक़-सेतु-रेलवे-जलमार्ग, सिंचाई निर्माण, ऊर्जा व वाटरशेड विकास शामिल हैं। इसी प्रकार, अब लायसेंसी खदान की 15 किलोमीटर परिधि को प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र जबकि खदान की 25 किलोमीटर परिधि को अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र माना जायेगा। 

इसके अलावा, अब जिला खनिज प्रतिष्ठान की राशि का उपयोग शहरी निकायों में भी किया जा सकेगा। खदान स्वामियों को नये नियमों में राहत भी दी गई है तथा यदि वे जिला खनिज प्रतिष्ठान में अपने अंशदान की राशि समय पर जमा नहीं करते हैं तो उनसे अब प्रति माह 2 प्रतिशत का ब्याज लेने के स्थान पर सालाना 12 प्रतिशत ब्याज लिया जायेगा। इसी प्रकार, अब जिला खनिज प्रतिष्ठान की राशि के उपयोग हेतु पांच वर्षीय भावी योजना भी बनाई जायेगी। 10 करोड़ रुपये से अधिक जमा वाले जिला खनिज प्रतिष्ठानों में ब्याज आदि से सालाना प्राप्ति की दस प्रतिशत की राशि को अक्षय निधि के रुप में अनवरत जीवन यापन के लिये शासकीय प्रतिभूति/बाण्ड तथा नेशनल बैंक में एफडी के रुप में निवेश करना होगा। इस अक्षय निधि का उपयोग ऐसे क्षेत्रों में होगा जहां पर खनन संक्रियायें बंद या समाप्त हो गई हैं, उन क्षेत्रों में सृजन और अनवरत जीवन यापन हेतु किया जायेगा। जिला खनिज प्रतिष्ठान का आडिट अब केंद्र सरकार के महालेखाकार द्वारा की जायेगी।