भोपाल: प्रदेश में वनों का प्रबंधन ‘‘कार्य आयोजना का क्रियान्वयन’’ योजना के अंतर्गत किया जाता है जिसके तहत वनों के संरक्षण, पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना, वृक्षारोपण के साथ ही वन सीमा सीमांकन, फायर लाइन कटाई-जलाई, अग्रि सुरक्षा, मुनारा निर्माण, मुनारा मरम्मत, वनकर्मियों के प्रशिक्षण, वन्यप्राणी प्रबंधन एवं कार्यालय व्यय के कार्य संपन्न कराये जाते हैं। इस कार्य हेतु इस साल वित्त वर्ष 2026-27 में 850 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे जबकि पांच वर्षों में 31 मार्च 2031 तक कुल 5 हजार 215 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। अगले वित्त वर्ष 2027-28 में 935 करोड़, वित्त वर्ष 2028-29 में 1 हजार 40 करोड़, वित्त वर्ष 2029-30 में भी 1 हजार 40 करोड़ तथा वित्त वर्ष 2030-31 में 1250 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। इन राशियों को व्यय करने की स्वीकृति राज्य सरकार ने जारी कर दी है।

उल्लेखनीय है कि कार्य आयोजनाओं का क्रियान्वयन योजना दसवीं पंचवर्षीय योजना से ही वन विभाग में निरन्तर संचालित है। योजना का स्वरुप सतत है। इस योजनान्तर्गत सोलहवें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल पांच वर्षों हेतु 5 हजार 215 करोड़ रुपये स्वीकृत हुये हैं जिन्हें अब व्यय किया जायेगा। यह योजना इसलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के अनुसार वन क्षेत्रों में स्थित कूपों में काष्ठ एवं बांस के विदोहन से प्रति वर्ष 1600 करोड़ रुपये का राजस्व वन विभाग को प्राप्त होता है तथा यह राशि पांच सालों में लगभग 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ही होती है जिसमे से 5 हजार 215 करोड़ रुपये पांच सालों में व्यय की जायेगी।