मप्र में अपनी चुनावी संभावनाओं को पुख्ता बनाने के लिये पार्टी के कोर ग्रुप में आज चिंता के नये विषय भी जुड़े हैं। भाजपा को अपने संगठन में आई शिथिलता परेशान कर रही है तो कार्यकर्ताओं का निष्क्रिय नजर आना भी चिंता बन गया है। वहीं कांग्रेस- राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की मप्र में आमद का असर आज नेताओं की जुबां पर दिखा। पार्टी मुख्यालय में इस बैठक के लिये सीएम शिवराज सिंह समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया,नरेंद्र सिंह तोमर,वीडी शर्मा आदि जुटे हैं। पार्टी के प्रभारी मुरलीधर राव व शिवप्रकाश भी मौजूद हैं। यह मंथन शाम तक चलने के आसार हैं। गौरतलब है कि महीने भर पहले ऐसा ही मंथन भोपाल के समीप रातापानी के जंगल में हुआ था।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि मप्र भाजपा इस वक्त संगठन से लेकर सरकार और नीतियों से लेकर आगामी निर्णयों तक नयेपन की तलाश में है,ताकि किसी भी संभावित एंटी इंकम्बेंसी को रोका जा सके। प्रभारी मुरलीधर राव व शिवप्रकाश भी आगाह कर चुके हैं कि एकरसता से भाजपा के संगठन में शिथिलता आ रही है। गौरतलब है कि संगठन प्रभारी ने भाजपा के जिले स्तर तक की बैठकें करके हालातों को समझने की कोशिश की है। बताया जाता है कि भाजपा की प्रदेश सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लगातार बेहतर बनाने के साथ ही सरकार या संगठन में पदों की गुंजाइश' निकालने पर कोर ग्रुप में विचार हो रहा है। इसके तहत सरकार या उपक्रम में पुराने कार्यकर्ताओं नेताओं को एडजस्ट करने की कोशिशें होंगी।
सिंधिया बैठक छोड़कर बाहर निकले
बैठक में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद ही अचानक बाहर निकल आए। भाजपा नेताओं ने बताया कि उन्हें बुखार था, इससे पहले सिंधिया ने कहा 2023 में कमल का फूल फिर मध्यप्रदेश में खिलेगा। हम साथ में बैठकर जीत का संकल्प लेंगे। वहीं, कैलाश विजयवर्गीय ने कहा यात्रा चाहे जितनी भी ऐतिहासिक हो, कमलनाथ के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार होगी। नरेंद्र तोमर ने भारत जोड़ो यात्रा को उन्होंने अप्रासंगिक इवेंट बताया।
कांग्रेस पर नजर
सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस की तैयारियों पर खासी नजर रखी है। भाजपा आगामी दिनों में राहुल गांधी की लगभग दो हफ्ते की मप्र में पैदल यात्रा के असर को आंकने में भी जुटी है। राहुल निमाड-मालवा में जिस इलाके से गुजरेंगे, लगभग उसी के पास भाजपा ने गत माह एक बड़ा चिंतन वर्ग करके आदिवासी वोट बैंक को कांग्रेस से वापस पाने की रणनीति पर विचार किया था। एक सूत्र का कहना है कि मप्र में आम आदमी से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिये भी फार्मूले तलाशे जा रही हैं,खासतौर पर पानी, बिजली,सड़क व स्वास्थ्य के मोर्चे पर भाजपा के भीतर ही राय बन रही है कि इस दिशा में 'ज्यादा काम किया जाना चाहिए।