भोपाल: कार्ल मार्क्स ने कहा था कि इतिहास खुद को दोहराता है, पहले एक त्रासदी की तरह और दूसरे एक मजाक की तरह..! मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयू) जबलपुर भी उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़े अपने इतिहास को दोहरा रहा है। एमयू सूत्रों के अनुसार, हाल हीं में नर्सिंग विद्यार्थियों की हजारों उत्तर पुस्तिकाएं पानी में गीली हो गईं।

वर्तमान परीक्षा नियंत्रक डॉ. सचिन कुचया ये तो स्वीकार कर रहे हैं कि उत्तर पुस्तिकाएं गीली हो गई हैं लेकिन उन्होंने इसका ठीकरा परीक्षा केंद्र पर फोड़ते हुए कहा है कि उत्तर पुस्तिकाएं गीली ही केंद्र से भेजी गई थीं। हालांकि कितनी उत्तर पुस्तिकाएं गीली हैं और यदि केंद्र से गीली उत्तर पुस्तिकाओं को भेजा गया तो उन्हें स्वीकार क्यों किया गया? इस बात का उनके ही नहीं पूरे एमयू प्रबंधन और यहाँ तक की कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल के पास भी कोई जवाब नहीं है। इस बात का भी कोई जवाब नहीं दे पा रहा है कि गीली उत्तर पुस्तिकाओं में फैली हुई स्याही की वजह से अस्पष्ट उत्तरों पर परीक्षार्थी को किस आधार पर अंक दिए जाएंगे।

दुर्घटना या षड्यंत्र!

एमयू के इतिहास में पहली बार उत्तर पुस्तिकाएं गीली नहीं हुई हैं। इससे पूर्व भी जहाँ तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और बाद में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यु) के जांच के दायरे में आईं डॉ. तृप्ती गुप्ता के कार्यकाल में भी जहाँ एक बार कथित तौर पर उत्तर पुस्तिकाओं के रखने के कक्ष में पानी भरने की खबर आई थी वहीं तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक डॉ. वृंदा सक्सेना के कार्यकाल में उत्तर पुस्तिकाओं के प्रांगण में जलने और लेडीज टॉयलेट के पानी में गलने की बात भी सामने आई थी।

इन घटनाओं के दौरान भी एमयू प्रबंधन सवालों के घेरे में रहा डॉ. सक्सेना के कार्यकाल में हुई दोनों घटनाओं में एफआईआर भी हुई लेकिन बाद में रहस्यमय तरीके से एफआईआर वापस ले ली गई। एमयू सूत्रों की मानें तो उत्तर पुस्तिकाओं के साथ हो रही घटनाएं महज दुर्घटनाएं ही हैं या कोई पास-फेल का षड्यंत्र, यह जांच का विषय है।

सुरक्षा की छात्र संगठनों ने की थी मांग-

एमयू द्वारा प्रदेश के समस्त संकाय की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बने केंद्र मे सीसीटीवी, फायर सेफ्टी न होने के चलते छात्र संगठनों ने बार-बार उत्तरपुस्तिकाओं के साथ हो रही कथित छेड़छाड़ की घटना का हवाला देते हुए सुरक्षा के लिए फायर सेफ्टी और सीसीटीवी की मांग भी की थी।

संख्या नहीं बता सकता-

डॉ. सचिन कुचया (परीक्षा नियंत्रक, एमयू) का कहना है कि यह सत्य है कि नर्सिंग की उत्तर पुस्तिकाएं गीली हैं, ये किन केंद्रों की है और इनकी संख्या क्या है फिलहाल मैं नहीं बता सकता। परीक्षा केंद्र से ही गीली उत्तर पुस्तिकाएं आईं थीं जिन्हें सुखाने का प्रयास किया जा रहा है।

(इस संबंध में एमयू कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल और कुछ ईसी सदस्यों से भी चर्चा का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया)

परीक्षा नियंत्रक निजी महाविद्यालय को लाभ देने के लिए अपनाते हैं नए-नए कारनामे

अभिषेक पांडे अध्यक्ष (एम.पी.एस.यू) का कहना है कि विश्वविद्यालय के ज़िम्मेदार पहले एक आधिकारी के छुट्टी पर रहते दो-दो ड्यूटी लगाते, फिर माफी देते टंकड़ त्रुटि के नाम पर बिना जांच के नम्बर बदलते, अब कॉपियां गीली कर सुखाया और पास करने का नया खेल किया जा रहा है।