भोपाल: नामीबिया से लाई गई फीमेल चीता आशा के गर्भवती होने की खबरों का प्रदेश के शीर्षस्थ अधिकारी भले ही खंडन करते रहे किंतु भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून डॉ. वाई.वी. झाला, डीन, वरिष्ठ वैज्ञानिक और चीता परियोजना के मुख्य सूत्रधार ने ये कहा कि नामीबिया से लाई गई फीमेल चीता 'आशा' में दिख रहे शारीरिक परिवर्तन उसके गर्भवती होने की ओर इशारा कर रहे हैं। डॉ. झाला को उम्मीद है कि कुनो नेशनल पार्क में दिवाली (24 अक्टूबर) के बाद चीता शावकों की 'किलकारी' सुनी जा सकती है।
17 सितंबर को पीएम नरेन्द्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। नामीबिया में भी इन चीतों को डेढ़ महीने से अधिक समय तक निगरानी में रखा गया था, इस दौरान आशा के गर्भवती होने के लक्षण विशेषज्ञों द्वारा देखे गए हैं। डॉ. झाला से मिली जानकारी के अनुसार, मादा चीता का औसत गर्भकाल 93 दिनों का होता है। ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि अक्टूबर अंत या नवंबर की शुरुआत में आशा शावकों को जन्म देंगी। वहीं कूनो में आशा का काफी ख्याल रखा जा रहा है, उसे एकांत में रखा गया है।
आशा को नर चीतों से रखा जाएगा दूर-
नामबिया से लाए गए इन चीतों को दो दिन में एक बार भैंस का मांस दिया जा रहा था, लेकिन आशा के गर्भवती होने के कारण उसे रोज मांस दिया जा रहा है। कूनो प्रबंधन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर इसके लिए अलग से बड़ा बाड़ा मुहैया कराया जाएगा, जहां सुरक्षा का पूरा अहसास हो। आशा को नर चीतों से भी दूर रखने के लिए कहा जा रहा है।
जन्म के दस दिन बाद आंख खोलते हैं नन्हें शावक-
विशेषज्ञों ने बताया कि चीता शावकों की मृत्यु दर 90 प्रतिशत होती है, ऐसे में जन्म के बाद उनका विशेष ध्यान रखना होगा। इन शावकों का वजन मात्र 250 ग्राम होता है। जन्म लेने के दस दिन बाद तक भी शावक अपनी आंखें नहीं खोल पाते हैं, इसीलिए सामान्य परिस्थितियों में मांसाहारी वन्य जीव जैसे तेंदुआ, लकड़बग्घा, जंगली कुत्ता, भालू आदि इन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। हालांकि कूनो के क्वारंटाइन बाड़े काफी सुरक्षित हैं और अब यहां निगरानी और बढ़ा दी गई है।
80 दिन बाद होगी पिक्चर क्लियर-
पीके वर्मा डीएफओ कूनो नेशनल पार्क का कहना है कि फीमेल चीता 'आशा' के गर्भवती होने पर अभी धुंध छाई हुई है।कैट फैमिली में गर्भवती होने की स्थिति 70 से 80 दिन में स्पष्ट होती है। इसलिए पार्क प्रबंधन अभी कुछ भी स्पष्ट कहने की स्थिति में नहीं है। हां, आशा पर विशेष नजर रखी जा रही है।