प्रदेश के निजी और सरकारी कॉलेजों की खाली सीटों को भरने के लिए उच्च शिक्षा विभाग काई-प्रवेश प्रक्रिया के तहत चौथा अतिरिक्त राउंड जारी है। वहीं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) के कुछ कोर्सों में प्रवेश स्थिति काफी लाचार बनी हुई है। स्थिति यह है कि यहां अभी तक करीब 25 डिग्री और डिप्लोमा कोर्स में एक भी प्रवेश नहीं हो सका हैं। जबकि राजधानी के कॉलेजों में पीजी प्रवेश की स्थिति काफी अच्छी बनी हुई है।
जानकारों की मानें तो बीते चार सालों में बीयू में नियमित तो दूर संविदा फैकल्टी भी नियुक्त नहीं हो सकी हैं। जिसका सीधा असर प्रवेश पर भी है और इसी के चलते बीयू के पांच डिग्री कोर्स और 20 डिप्लोमा कोर्स में एक भी प्रवेश नहीं हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, यहां एमए एक्सटेंशन एजुकेशन एंड सोशल वर्क में तीन साल से एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ है। एमए अरबिक की दस सीट, एमए लिंग्जेस्टिक की दस सीट, एमएससी लिम्नोलाजी दस, एमएससी बायोलाजी की बीस, एमएससी एप्लाईड जियोलाजी की बीस, एमए इतिहास की दस सीटों में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। डिप्लोमा में मार्डन अरबिक लेंग्वेज, ईको टूरिज्म, एनिमल रिसैस मेनेजमेंट, बायोलाजी, लिम्नोलाजी, बायोसेफ्टी एंउ बायोसिक्योरिटी, मेडिकल लैब, प्लांट टीशूस कल्चर, वर्मी कम्पोस्ट टेक्नालाजी, मशरूम, रुरल डेवलपमेंट, वेब एंड ग्राफिक्स, मोबाइल एप्प डेवलपमेंट, बिगडाटा, बिजनेस इंटीलेजेंस, इलेक्ट्रनिक मीडिया, एनर्जी आडिट मेनेजमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग की तरफ विद्यार्थियों ने देखा तक नहीं है।