भोपाल: प्रदेश में विदेशी पक्षिओं और कछुओं के विक्रय पर कोई रोक नहीं है। वन विभाग के अनुसार, विदेशी प्रजातियों के पक्षिओं एवं कछुओं को आमजन द्वारा पाला जा सकता है। लेकिन वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची एक से पांच तक में सम्मिलित वन्यप्राणियों को आमजन द्वारा पालना प्रतिबंधित है। इन अनुसूची में सौ से अधिक वन्यप्राणी दर्ज हैं।

वन विभाग के अनुसार, पाले जाने वाले विदेशी पक्षिओं एवं कछुओं की उसके पास कोई सूची उपलब्ध नहीं है। लेकिन इन विदेशी जीवित प्रजाति को रखने के लिये केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिये आवेदन देना जरुरी होता है। आवेदन दर्ज होने के बाद संबंधित वनाधिकारी स्थल निरीक्षण करता है और उसके बाद उसकी रिपोर्ट पर परिवेश पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन दर्ज होता है।

उल्लेखनीय है कि भोपाल, इंदौर सहित कई नगरों में विदेशी पक्षिओं एवं कछुओं का विक्रय होता है तथा आमजन द्वारा पालने के उद्देश्य से इन्हें खरीदा जाता है। विभाग का कहना है कि लोग ऐसे पक्षी एवं कछुये खरीदने के बाद उनका परिवेश पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करायें।