MP Election 2023: मध्य प्रदेश के बालाघाट में कल यानी 27 नवंबर के दिन ‘डाक मत पत्र’ छंटनी का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो एमपी की सियासत में घमासान मच गया. इसके बाद कांग्रेस ने धांधली का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से कई शिकायतें की. फिर देखते ही देखते ये पूरा मामला राजधानी भोपाल तक आ पहुंचा. कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कलेक्टर और मुख्य जिला निर्वाचन अधिकारी गिरीश कुमार मिश्रा पर कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाघाट के एक निर्वाचन सहायक नोडल अधिकारी हिम्मत सिंह को तुरंत निलंबित कर दिया गया.
वायरल वीडियो पर शुरू हुई सियासत-
बालाघाट में मत पत्र गड़बड़ी के वायरल वीडियो पर कटाक्ष करते कांग्रेस ने एक्स यानी (ट्विटर) पर लिखा, कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता हर समय सजग और चौकन्ना रहें. अपने जीवनकाल की सबसे करारी हार की तरफ़ बढ़ रही बीजेपी अंतिम सांस तक धांधली करने की कोशिश करेगी और कुछ बीजेपी पोषित अफ़सर इसमें बीजेपी का साथ भी देंगे. हमें पूरी सजगता के साथ लोकतंत्र की रक्षा करना है और बीजेपी के नापाक मंसूबों को किसी भी क़ीमत पर कामयाब नहीं होने देना है. यदि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्त्तव्यों से समझौता करते नज़र आये और निर्वाचन की निष्पक्षता को प्रभावित कर बीजेपी के पक्ष में काम करते नज़र आए तो चुप नहीं बैठें, कड़ा विरोध दर्ज करायें. याद रहे! आप लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी हैं. अन्याय का विरोध आपका कर्तव्य है. निष्पक्ष निर्वाचन आपका अधिकार है. पारदर्शिता लोकतंत्र का मूल है. ग़लत नहीं करना और ग़लत नहीं होने देना हम कांग्रेसियों की पहचान है.
कमलनाथ ने साधा निशाना-
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी बालाघाट की घटना के बाद एक्स यानी (ट्विटर) पर लिखा, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा लोकतंत्र के बुनियादी उसूल हैं. कल बालाघाट में डाक मतपत्रों को जिस तरह से खोला गया, वह गंभीर कदाचरण है. उसके बाद सरकारी मशीनरी और जिम्मेदार अधिकारियों ने जिस तरह से इस कृत्य को सही साबित करने की कोशिश की, वह और भी अक्षम्य अपराध है. मैं चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारी और कर्मचारियों को याद दिलाना चाहता हूं कि इस समय वह निर्वाचन आयोग के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं, जो मध्य प्रदेश सरकार से अलग एक स्वायत्त संस्था है. वे इस समय किसी पार्टी या मंत्री के मातहत काम नहीं कर रहे हैं.
उन्होंने आगे लिखा, इसलिए सभी अधिकारी कर्मचारियों से निवेदन है कि वह किसी भी असंवैधानिक या गैरकानूनी आदेश का पालन न करें और सिर्फ वहीं कार्य करें जो करना उनका प्रशासनिक दायित्व है. एक-एक अधिकारी और कर्मचारी की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट जनता के पास है. मैं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से भी आग्रह करता हूं कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए कड़े से कड़े संघर्ष के लिए तैयार रहें. 3 दिसंबर को मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर जनता की मोहर लग जाएगी. इसलिए वे निर्द्वंद्व होकर अपने कार्य में जुट जाएं, सत्यमेव जयते.
गोविंद सिंह बोले- अधिकारियों ने की मतपत्रों में गड़बड़ी
'एमपी तक' की रिपोर्ट के मुताबिक, बालाघाट में मतपत्र गड़बड़ी के आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि अकेले बालाघाट ही नहीं, बल्कि समूचे मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के इशारे पर जिला कलेक्टरों और अधिकारियों ने मतपत्रों में गड़बड़ी की है. इकबाल सिंह बैंस को तत्काल मुख्य सचिव के पद से हटाया जाए. मैंने पहले भी कहा था कि इकबाल सिंह बैंस होंगे तो चुनाव निष्पक्ष नहीं होगा. बीजेपी के एजेंट के तौर पर इन्होंने काम किया है. अगर ये मतगणना में रहते हैं तो निश्चित तौर पर गड़बड़ी कराएंगे. इसलिए निर्वाचन आयोग से अनुरोध है कि इनको हटाया जाए. नीचे से ऊपर तक सरकार के इशारे पर ये काम हुआ है.
उन्होंने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि मेरी विधानसभा क्षेत्र लहार में ही 11 नवंबर को कम से कम 600 कर्मचारी, जिनकी बसें किराए पर ली गई थीं, उन्हें मतदान से वंचित किया गया. जबकि, उन्होंने अपने आवेदन फॉर्म भरे थे. जिला निर्वाचन अधिकारियों को पता ही नहीं था 15 नवंबर तक कि मतपत्र कहां रखे गए हैं. हमारी शिकायत पर ढूंढे गए. वो सीलबंद पेटी में मंत्रालय गए थे, तो किसके आदेश पर सील टूटी. इसकी भी शिकायत हमारे कार्यकर्ता ने की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
क्या है पूरा मामला-
पूरा मामला बालाघाट में तहसील कार्यालय में पोस्टल बैलेट पेपर के स्ट्रॉन्ग रूम का है. जिसमें बाहर और भीतर दोनों तरफ CCTV लगे हुये हैं. यहां पर कल (27 नवंबर) दोपहर में स्ट्रॉन्ग रूम को खोलकर पोस्टल बैलेट का शॉर्टिंग, अर्थात 50-50 का बंडल बनाकर रखा जा रहा था. लेकिन, इस कार्य को लेकर ऐसा कन्फ्यूजन हुआ कि कांग्रेस की बालाघाट प्रत्याशी श्रीमती अनुभा मुंजारे सहित उनके समर्थक बड़ी संख्या में वहां पहुंच गये और हंगामा करने लगे.
जिसके बाद एमपी में कांग्रेस की तरफ से निर्वाचन संबंधी कार्रवाई के लिए प्रभारी बनाए गए जेपी धनोपिया ने आरोप लगाया कि बालाघाट के मुख्य निर्वाचन अधिकारी गिरीश कुमार मिश्रा की अनुमति के बिना स्ट्रॉन्ग रूम खोलकर डाक मत पत्रों की छंटनी कैसे हो सकती है, ये नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, बालाघाट का जो वीडियो वायरल हुआ है उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. हालांकि, कुछ नेताओं के वीडियो जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पक्ष में भी नज़र आए, जिस पर जेपी धनोपिया ने कहा कि बालाघाट जिला प्रशासन के पक्ष में जो वीडियो जारी किए गए, वह दबाव में बनवाए गए हैं.
कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने आगे बताया, जब 2 दिसंबर की तारीख तय हुई है तो फिर बालाघाट में मतपत्र के साथ अलग से छेड़छाड़ क्यों की गई? डाक मतपत्र की छंटनी और स्ट्रॉन्ग रूम खोलना बेहद गंभीर मामला है. इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम राजन को भी ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई है. वहीं, पीसीसी के प्रवक्ता के.के मिश्रा ने भी कलेक्टर पर कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने निर्वाचन आयोग से पत्र लिखकर मांग की गई है कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान बालाघाट कलेक्टर को दूर रखा जाए.
कलेक्टर ने दी वायरल वीडियो पर सफ़ाई-
फिलहाल, बालाघाट कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने भी सफ़ाई देते हुए वीडियो जारी किया. जिसमें उन्होंने बताया कि कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं की मौजूदगी में डाक मत पत्र की छंटनी का काम हुआ है. इसमें किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है. दोनों ही दलों सहित सभी प्रत्याशियों को फोन पर सूचना दे दी गई थी. उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मत पत्र छंटनी का काम हुआ है.
चुनाव आयोग ने दी विस्तृत जानकारी-
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि मत पत्र में किसी भी तरह से कोई गिनती नहीं की गई है. केवल डाक पत्र की विधानसभावार शॉर्टिंग की जा रही थी. सभी डॉक मतपत्रों को 50-50 के बंडल में बनाकर रखा जा रहा था. जबकि, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजदूगी में ही डॉक मतपत्रों की शॉर्टिंग की गई थी. हालांकि, तीन बजे के निर्धारित समय से शॉर्टिंग होनी थी, परंतु नोडल अधिकारी ने 1:30 बजे से शॉर्टिंग शुरू कर दी थी. शॉर्टिंग की सूचना भी ठीक तरह से नहीं दी थी. ऐसे में इस लापरवाही के चलते नोडल अधिकारी को संस्पेंड कर दिया गया है.