प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह मध्यप्रदेश के साथ ही देश को भी एक ऐतिहासिक सौगात दी है। पीएम ने सुबह प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए चीतों को छोड़ा। इसके साथ ही 70 वर्ष के बाद एक बार भारत की धरती पर चीता दौड़ने लगेगा।
इसके साथ ही एमपी की धरती पर अब में चीते भी नज़र आएंगे लेकिन क्या आप जानते हैं एमपी में केवल चीते ही नहीं हैं और भी कई प्राणी पाए जाते हैं, जिनकी संख्या भी एमपी में ही सबसे ज़्यादा है।
देश और दुनिया में अब तक एमपी टाइगर स्टेट के रूप में अपनी पहचान रखता है। मध्यप्रदेश ने 2018 की जनगणना में देश के 'टाइगर स्टेट' होने का गौरव हासिल किया था। अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट 2018 के अनुसार, राज्य में 526 बाघ हैं, जो देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं। वहीं, प्रदेश में छह टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय दुबरी हैं।
मध्यप्रदेश तेंदुओं की संख्या में भी पहले नंबर पर है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार देश में तेंदुए की गणना के आंकड़ों से पता चलता है, कि देश में सबसे ज्यादा 3,421 तेंदुए मध्यप्रदेश में हैं।
टाइगर स्टेट के खिताब के बाद मप्र को घड़ियाल स्टेट का भी दर्जा मिला। चंबल नदी पर बने घड़ियाल अभयारण्य में घड़ियालों की तादाद बढ़कर अब 1255 हो गई है। यानि कि एमपी को जलीय जीव के संरक्षण और संवर्धन के मामले में भी एक और उपलब्धि हासिल हुई।
बात करें वल्चर्स की तो प्रदेशभर में कुल 6700 गिद्ध दिखे हैं। इनमें सबसे अधिक गिद्ध श्योपुर में 532 पाए गए हैं जिनमें कूनो सेंक्चुरी में 315, सामान्य वनमंडल में 217 गिद्ध हैं। मंदसौर में 513, पन्ना नेशनल पार्क में 470 और भोपाल में 444 गिद्ध काउंट किए गए हैं।
यानि कि चीता स्टेट मध्यप्रदेश में 8 चीते, सबसे ज्यादा 526 बाघ, सबसे ज्यादा 3421 तेंदुए मौजूद हैं। साथ ही प्रदेश में 30% से अधिक जंगल अधिक 10 राष्ट्रीय उद्यान, 6 टाइगर रिजर्व, 25 वन्य जीव अभ्यारण मौजूद हैं वहीं घड़ियाल और वल्चर भी मध्यप्रदेश में ही सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।