भोपाल: प्रदेश के वनमंडलों में अब घांस रजिस्टर रखे जायेंगे। इसके लिये वन बल प्रमुख ने सभी डीएफओ को निर्देश दिये हैं। दरअसल वर्तमान में वन क्षेत्रों से उत्पादित होने वाली घांस के उत्पादन का कोई रिकार्ड संधारित नहीं किया जा रहा है। इसीलिये सभी डीएफओ को घांस रजिस्टर रखेने के लिये कहा गया है।

इसके अलावा, सभी डीएफओ से यह भी कहा गया है कि वानिकी कार्य के लिये मजदूर उपलब्ध न हो तो उक्त मजदूरी मद का पैसा सरेंडर कर मशीन से कार्य कराने हेतु संबंधित मशीन मद से पैसों की मांग की जाये।

नीलगिरी के खम्बे लगायें :
सभी डीएफओ  से कहा गया है कि वृक्षारोपण क्षेत्रों में आरसीसी खंभो के स्थान पर नीलगिरी के खम्भे या समीपस्थ वन डिपो में उपलब्ध साजा या अन्य प्रजाति की बल्लियों का उपयोग किया जाये। इसी प्रकार, यदि किसी वृक्षारोपण क्षेत्र में पौधों की जीवितता का प्रतिशत कम है तो आगामी वर्षों की सुरक्षा राशि में से कुछ राशि को सरेंडर करके उक्त राशि से मूत पौधों के स्थान पर रोपण के लिये अनुसंधान एवं विस्तार की रोपणी से पौधे लिये जायें। इसके अलावा, बच्चों के लिये आयोजित अनुभूति कार्यक्रमों में भोजन की व्यवस्था के लिये वन धन केंद्रों में बनाये जा रहे दोना-पत्तल का उपयोग किया जाये और अनुभूति कार्यक्रम की थीम मैं भी बाघ हूं, का प्रचार-प्रसार किया जाये और छात्र-छात्राओं को वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये प्रेरित किया जाय।