भोपाल: प्रदेश में ऐसी सम्पत्तियां जो पहले से ही विद्यमान हैं, उनके री डेवलपमेंट के अनुबंध पर भी अब स्टाम्प शुल्क लगेगा। पहले सिर्फ सिर्फ भूमि के विकास के अनुबंध पर ही स्टाम्प शुल्क लगता था। यह नया प्रावधान भारतीय स्टाम्प मप्र संशोधन विधेयक को जोकि विधानसभा के गत वर्षाकालीन सत्र में पारत किया गया था, को राज्यपाल द्वारा मंजूरी देने से कानून लागू हो गया है। पुनर्विकास संबंधी अनुबंध इस प्रावधान में भूमि के बाजार मूल्य के 0.25 प्रतिशत के बराबर परन्तु न्यूनतम एक हजार रुपये का स्टाम्प शुल्क लगेगा।

इसी प्रकार, इस कानून में हाइपोथिकेशन के दस्तावेजों पर ऋण की रकम पर भी स्टाम्प शुल्क लेने का नया प्रावधान किया गया है जो 50 हजार रुपये तक 50 रुपये, 50 हजार रुपये से 5 लाख रुपये तक 500 रुपये, 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक 2 हजार रुपये, 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक 10 हजार रुपये एवं 50 लाख रुपये से अधिक के ऋण प्रत्याभूत पर ऋण की रकम के 0.23 प्रतिशत के बराबर परन्तु अधिकतम 7.50 लाख रुपये स्टाम्प शुल्क होगा।

इसके अलावा, अब बैंक गारंटी के नवीनीकरण पर मात्र एक हजार रुपये का स्टाम्प शुल्क लिया जायेगा। इसी प्रकार, अब एक वर्ष से कम अवधि के किराये नामों/पट्टों पर देय स्टाम्प शुल्क 500 रुपये ही लगेगा जबकि एक वर्ष से अधिक के किराये नामों/पट्टों पर स्टाम्प शुल्क न्यूनतम 500 रुपये होगा।