भोपाल: पोषण आहार योजना के तहत गरीब बच्चों और महिलाओं को दिए जाने वाले राशन में 110 करोड़ का घोटाला हुआ हैं। यह भारत की महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट कहती है। लेकिन प्रदेश की शिवराज सरकार रिपोर्ट पर कार्यवाही करने की जगह इस रिपोर्ट  को ही गलत साबित करने में तुल गई है।

बड़े विरोधाभासी बयान जिम्मेदारों द्वारा दिए जा रहे है। मुख्यमंत्री जी कह रहे है की यह अंतिम रिपोर्ट नही है। एक मंत्री कह रहे है कि रिपोर्ट में जो भी आरोप है उनके जवाब दे दिए गए है। कोई कुछ कह रहा है कोई कुछ कह रहा है। सवाल यह है की जब आपके पास जवाब है तो अभी तक कैग के पास क्यों नही भेजे और जब आपके हिसाब से पूरे मामले में अनियमितता हुई ही नहीं तो 36करोड़ का भुगतान क्यों रोका गया है।

मामला बहुत सीधा है चूंकी जिस विभाग यानी महिला और बाल विकास में यह घोटाला हुआ है वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है, इसलिए पूरी सरकार घोटाला स्वीकार करने की जगह कैग की रिपोर्ट को ही गलत साबित करने में जुट गई है। बदहवासी में सरकार यह भूल गई की कैग की रिपोर्ट को हल्के में लेना भारी पड़ जाता है वह इतना भारी बवंडर पैदा करती है की बड़े बड़े नेता अर्श से फर्श पर पहुंच जाते है।

कैग की रिपोर्ट में ही बोफोर्स घोटाले का जिन्न निकला था और उसने केंद्र की सत्ता से स्व. राजीव गांधी को दूर कर दिया था। टू जी, थ्री जी, कोयला घोटाला भी कैग ने ही उजागर किया था। इस चक्कर में कई मंत्रियों को जेल जाना पड़ा था राज्य का महालेखाकार भी इसी तर्ज पर काम करता हे। सरकार के दबाव में वह अपनी रिपोर्ट कूड़े दान में फेक देगा इसकी उम्मीद नहीं के बराबर हैं।

घोटाला हुआ है यह कैग की रिपोर्ट को सरसरी तौर से पड़ने भर से पता चल जाता है। पहला बिंदु पोषण आहार जिन वाहनों से ढोना बताया गया वह मोटर साइकिल,स्कूटर व पानी के टैंकर के निकले। सरकार का जवाब है यह लिपकीय त्रुटिवश हो गया।एक वाहन का नबर गलत हो जाय समझ में आता है ,दो का तीन का भी हजम हो सकता है। लेकिन दर्जनों वाहनों के नंबर गलत लिख दिए जाय यह संभव नहीं है।

दूसरा बिंदु है कि पोषण आहार उत्पादन केंद्रों में उतनी बिजली की खपत ही नही हुई जितना पोषण आहार उत्पादन में लगनी थी। तो क्या बिना बिजली के कारखाने चले और उनमें पोषण आहार बना। यह भी संभव नहीं है। सरकार का मासूम सा जवाब हे की पोषण आहार में अलग अलग खाद्य वस्तुएं बनती है इसलिए कही कम कही ज्यादा बिजली की खपत होती है।

सरकार यह जवाब देते समय यह भूल गई की कैग अपनी रिपोर्ट विभाग से जानकारी लेकर ही बनाता है। विभाग के दस्तावेजों से ही कैग ने यह घोटाला उजागर किया है। फिर रिपोर्ट गलत कैसे हो सकती है। चलो फिर भी सरकार की दलीलें मानकर एक बार मान भी लिया जाय की घोटाला,अनियमितता नही हुई। फिर सवाल यह उठता है की पोषण आहार सप्लाई करने वालो के 36 करोड़ के बिल क्यों रोक दिए गए। केवल यही एक कार्यवाही इतना बताने को काफी है कि दाल में कुछ काला तो है ।

हालाकि कांग्रेस तो पोषण आहार घोटाले में पूरी दाल ही काली बता रही है उसके अनुसार घोटाला 110 करोड़ का नही लगभग 300 करोड़ का है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तो सीधे घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज से इस्तीफा देने की मांग कर रहे है।

दरअसल यह घोटाला मुख्यमंत्री शिवराज के लिए गले की हड्डी बन गया है। यह पूरा घोटाला कांग्रेस की कमलनाथ सरकार और शिवराज सरकार दोनो के कार्यकाल के समय हुआ है। कमलनाथ सरकार में महिला और बाल विकास विभाग इमरती देवी के पास था जो अब बीजेपी के नेता हो गईं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक इमरती देवी को सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है।

इसलिए बीजेपी इस घोटाले को कांग्रेस के पाले में नही फेक पा रही है। शिवराज सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू से महिला और बाल विकास विभाग अपने पास ही रखा है इसलिए वह भी इस घोटाले की आंच से बच नहीं पा रहे है।यही कारण है की इस घोटाले को दबाने के लिए पूरी सरकार लगी हुई है। हर तरीका अपनाया जा रहा है की इस घोटाले की गूंज कम हो। लेकिन अभी तक तो सारे प्रयास विफल ही नजर आ रहे है।

कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने इस घोटाले को लेकर पूरी बीजेपी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। आप तो इस घोटाले को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल कर रही हैं।पहली बार हे की मध्यप्रदेश में हुए इस घोटाले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार अपने को असहज महसूस कर रहीं हैं।केंद्र की मोदी सरकार भी लगता है इस काले कारनामे की कालिख से अपने को इस बार नही बचा पाएगी।