भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  दिल्ली हुए रवाना।

भाजपा हाईकमान  से मुलाकात के लिए  अचानक दिल्ली हुए रवाना सीएम चौहान। 

सीएम के  साथ गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह भी हुए दिल्ली रवाना।

 विशेष विमान से हुए स्टेट हेंगर भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना। 

 आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के बाद मध्य प्रदेश में राजनीति गरमा गई है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले में चर्चा के लिए मुख्यमंत्री को बुलाया है दिल्ली। 

सूत्रों के मुताबिक चौहान दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी करेंगे मुलाकात।

'न्यायालय का निर्णय प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगा'

ओबीसी पर निवेश करेगी सरकार सीएम की विदेश यात्रा निरस्त:

मप्र में ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण के बिना ही चुनाव कराए जाने के आदेश के बाद मची सियासी उथलपुथल के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 14 मई से अपनी विदेश यात्रा निरस्त करने का फैसला आज किया है। ज्ञात हो कि कल ही उच्चतम न्यायालय द्वारा कल मध्यप्रदेश के स्थानीय निकायो मे बिना पिछड़ा वर्ग आरक्षण के चुनाव कराने का निर्णय सुनाया है।

मप्र की शिवराज सरकार इस मामले में रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी में है और संभवतः आज शाम तक इस मोर्चे पर कोई ठोस तैयारी सामने आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक सीएम शिवराज ने कल और आज भी इस मामले में अफसरों और कानूनविदों से चर्चा के कई दौर किये हैं। रिव्यू पिटीशन के लिये तर्क और आधारों की गुंजाइश' खोजी जा रही हैं। शिवराज ने कहा है कि मेरी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। न्यायालय का निर्णय स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने वाला निर्णय है। 

इसलिए राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनः संशोधन याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। शिवराज के मुताबिक- 'मेरा 14 मई से मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए विदेश प्रवास तय था, किंतु इस समय न्यायालय में पुनः अपना पक्ष रखना तथा पिछड़ा वर्ग के हितों का संरक्षण करना मेरी प्राथमिकता है इसलिए मैं अपनी प्रस्तावित विदेश यात्रा निरस्त कर रहा हूं। उल्लेखनीय है कि मप्र में प्रस्तावित इन्वेस्टर्स समिट के लिये मुख्यमंत्री अफसरों के दल के साथ विदेश यात्रा पर जाने की तैयारी में थे।

सरकार ओबीसी को आरक्षण के बिना पंचायत व निकाय चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है, इसे लेकर कुछ महीने पहले भी भारी कवायद हो चुकी है। कांग्रेस भी ओबीसी को आरक्षण की पैरोकारी कर रही है और भाजपा पर ओबीसी आरक्षण के पक्ष में ठोस तर्क सामने रखने में नाकाम होने का आरोप लगाकर भाजपा को ओबीसी आरक्षण

कांग्रेस ने कहा पहले की यात्राओं से क्या हासिल

इधर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के विदेश यात्रा निरस्त करने के फैसले पर चुटकी ली है। मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि वैसे भी मामाजी विदेश क्यों जा रहे थे, उनकी पहले की यात्राओं से मप्र को क्या हासिल हुआ है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में बिना ओबीसी आरक्षण के ही नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग इसके लिए तैयार है, लेकिन सरकार इस पर असमंजस में है। शिवराज सिंह चौहान रिव्यू पिटीशन की बात कर रहे हैं। कांग्रेस कह रही है कि सरकार के पास रिव्यू कराने का कोई ठोस आधार ही नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग और मध्य प्रदेश सरकार अधिसूचना जारी करे। ज्ञात हो कि सरकार ने 49 फीसदी आबादी बताते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए मप्र में 35% आरक्षण मांगा था, लेकिन बताते हैं कि रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही कर दी। निकाय वार रिपोर्ट ही नहीं बनाई। अंतत- सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अधूरी रिपोर्ट खारिज कर दी।

बैठकें भी निरस्त, गोंदिया गये शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 मई को अपनी विदेश यात्रा निरस्त कर दी है। साथ ही आज इस यात्रा को लेकर होने वाली तमाम तैयारी बैठकें भी अब नहीं होंगी। अलबत्ता मुख्यमंत्री आज पौधारोपण के बाद तय कार्यक्रम के मुताबिक गोंदिया रवाना हो गये।

सीएम ने बुधवार सुबह ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखने और अन्य पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करने की अपनी प्राथमिकता को देखते हुए उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार सुबह घोषणा की कि उन्होंने मध्य प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए 14 मई से प्रस्तावित अपनी विदेश यात्रा रद्द कर दी है।

सीएम ने बुधवार सुबह ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखने और अन्य पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करने की अपनी प्राथमिकता को देखते हुए उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया है| 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्थानीय निकायों में ओबीसी के आरक्षण पर असर पड़ेगा और इसलिए राज्य सरकार ने समीक्षा याचिका दायर करने का फैसला किया।

"मेरी सरकार अन्य पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है", सीएम ने कहा।

विशेष रूप से, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में पंचायत चुनावों में ओबीसी के लिए आरक्षण बढ़ाने के राज्य सरकार के दावे को खारिज कर दिया और राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव कराने के लिए दो सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया।

अधिकारियों के अनुसार, सीएम की विदेश यात्रा के संबंध में बुधवार को होने वाली सभी आधिकारिक बैठक रद्द कर दी गई हैं।

कांग्रेस ने OBC आरक्षण को लेकर BJP और शिवराज सरकार पर बड़ा हमला बोला। कहा कि दोनों RSS के एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने पक्ष मजबूती से नहीं रखा। इसी का परिणाम है कि सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण के बिना पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने का फैसला दिया। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि यदि BJP और शिवराज सरकार की OBC को आरक्षण देने की मंशा है तो विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाए। यहां से संविधान में संशोधन के लिए प्रस्ताव के लिए भेजिए। केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। कांग्रेस ने मांग रखी कि सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश मे ओबीसी को 27% आरक्षण की व्यवस्था की जाए। जिस तरह से सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन किया, उसी तरह पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण देने BJP सरकार संशोधन विधेयक लेकर आए। पटेल ने कहा कि ऐसा प्रावधान संशोधन करके किया जा सकता है। ऐसा करते हैं तो न्यायालय का जोर नहीं चलेगा।

कमलनाथ ने क्या कहा?

अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत…?

शिवराज जी , जब आपके पास सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त समय था , तब तो आपकी सरकार ने कुछ किया नही , आधी- अधूरी रिपोर्ट व आधे-अधूरे आंकड़े पेश किये…जिसके कारण ओबीसी वर्ग का हक़ मारा गया और प्रदेश में बग़ैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव का निर्णय सामने आया।अब आप भले अपनी विदेश यात्रा निरस्त करे या कुछ भी कहे लेकिन आपकी सरकार के नाकारापन का खामियाजा तो ओबीसी वर्ग के नुकसान के रूप में सामने आ ही चुका है। आपने जो ज़ख़्म दिये है , अब वो किसी भी दवा से ठीक होने वाले नही है। प्रदेश का ओबीसी वर्ग इस सच्चाई को जान चुका है , अब वो आपके किसी भी गुमराह करने वाले झांसे में आने वाला नही है। शिवराज सरकार का ओबीसी वर्ग विरोधी चेहरा आज एक बार फिर सामने आ गया है। शिवराज सरकार शुरू से ही नहीं चाहती थी कि ओबीसी वर्ग को किसी भी आरक्षण का लाभ कभी भी मिले , इसको लेकर तमाम हथकंडे व तमाम साजिशें रची जा रही थी।