भोपाल: वन मंत्री विजय शाह सोमवार से 3 दिन तक विभाग की समीक्षा करने जा रहे हैं. शाह चाहकर भी अपने महकमे में नवाचार नहीं कर पा रहे हैं. वे जो चाहते थे, उस पर किंतु-परंतु लगाकर अफसर अड़ंगा डाल रहें है.
यहां तक कि जिस दागी डीएफओ देवांशु शेखर की पोस्टिंग खंडवा बल मंडल में हुई है, वहीं शाह के आदेश की नाफरमानी कर रहा है. हालांकि डीएफओ की पोस्टिंग तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने शाह की मंशा के विपरीत खंडवा में की थी.
मतलब, निहत्थे मैदानी अमले को करंट वाले डंडे और अत्याधुनिक के कैप, जिसमें टॉर्च और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा है, उसे नहीं खरीद पाए. यहां तक कि वीडियो कांफ्रेंसिंग में जो भी मौखिक निर्देश दिए, उन सभी को अफसरों ने सिगरेट के धुएं की तरह उड़ा दिया.
वीडियो कांफ्रेंसिंग में निर्देश थे कि निर्माण कार्य और चैन लिंक फेंसिंग कार्य वगैरह की खरीदी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी नहीं करेंगे. निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी के जरिए कराने के मौखिक आदेश दिए थे. इसके लिए तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास चितरंजन त्यागी को एक महीने में नियम बनाने के लिए कहा था.
मंत्री के निर्देश के बाद त्यागी 6 महीने विभाग में रहे किंतु नियम नहीं बना पाए. शाह ने प्रत्येक वन मंडल में 10 हेक्टेयर में आदर्श जंगल तैयार करने के निर्देश दिए थे, 3 महीने बाद भी अभी तक आदर्श जंगल का ब्लू प्रिंट तैयार नहीं हो पाया है.
दिलचस्प पहलू यह है कि वन मंत्री शाह जिस दागी डीएफओ देवांशु शेखर को खंडवा ले गए, वहीं उनके आदेशों की नाफरमानी कर रहा है. यानी खंडवा डीएफओ कार्यालय में 3 किलोवाट सोलर प्लांट लगाने के निर्देश थे, वे आज तक नहीं लग पाए हैं. डीएफओ, एसडीओ और रेंजर को जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करने के निर्देश भी हवा हो गए.