भोपाल: जंगल महकमे में चंद चहेते आईएफएस अधिकारियों को कार्य योजना में छूट देकर दूसरे अफसरों की पदस्थापना आदेश जारी करने का मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया है. वन विभाग के वर्किंग प्लान पदस्थापना आदेश को चुनौती देने वाले आईएफएस हरिशंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया.

जबकि दूसरे आईएफएस अधिकारी रमेश चंद विश्वकर्मा के खिलाफ एक्शन नहीं लेने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक ट्रिब्यूनल से याचिकाकर्ता आईपीएस अधिकारी रमेश विश्वकर्मा की याचिका का फैसला नहीं हो जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए.

वन विभाग के सचिव अतुल कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के नियम 3 में निहित प्रावधान के तहत तत्काल प्रभाव से एचएस मिश्रा को निलंबित किया जाता है. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय भोपाल होगा.

निलंबन आदेश में कहा गया है कि मिश्रा को वर्किंग प्लान पुनरीक्षण का उत्तरदायित्व सौंपा गया है. कार्य योजना का समय में पुनरीक्षण शासन के राजस्व के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है. समय पर कार्य योजना पूर्ण ना होने से वृक्षों की कटाई की अनुमति में विलंब होता है, जिससे राज्य शासन को राजस्व हानि होती है. यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्किंग प्लान बनाने के लिए करीब 2 साल का समय लगता है. 2 साल के बाद वर्किंग प्लान को केंद्र सरकार स्वीकृति लेनी पड़ती है, तब जाकर वृक्ष कटाई की अनुमति दी जा सकती है.

यही वजह है कि विभाग के सेवानिवृत पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों ने निलंबन आदेश मैं दर्शाए गए कारण को हास्यास्पद बताया, क्योंकि उत्तर बैतूल, पूर्व मंडला, छिंदवाड़ा उत्तर पन्ना भोपाल और राजगढ़ सहित 11 वर्किंग प्लान केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए पिछले 6 महीने से लंबित पड़े हैं. विभाग के आला अफसरों ने उन्हें स्वीकृत कराने के लिए कोई पहल नहीं की है. यही नहीं भोपाल के वर्किंग प्लान 2 साल विलंब से कंप्लीट हो पाया, वह भी तब जब सेवानिवृत पीसीसीएम राजेश कुमार ने वर्किंग प्लान बनाने वाले प्रभात कुमार वर्मा के खिलाफ कार्यवाही शुरू की.

निलंबन आदेश को चुनौती देंगे मिश्रा-

हरिशंकर मिश्रा वन विभाग द्वारा जारी निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. मिश्रा का कहना है कि मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए निलंबन आदेश जारी किया गया है. जबकि वर्किंग प्लान सिवनी में पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक न्यायाधिकरण जबलपुर (कैट)  में 13 अक्टूबर को सुनवाई है. इसके पहले हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य शासन ने मिश्रा के अभ्यावेदन को इस तर्क के साथ खारिज कर दिया था कि वर्किंग प्लान संबंधित विभाग की कोई पॉलिसी नहीं है.

विश्वकर्मा के खिलाफ हाईकोर्ट ने लगाई रोक-

आईएफएस रमेश चंद विश्वकर्मा ने वर्किंग प्लान पदस्थापना को लेकर पहले कैट में चुनौती दी थी. विश्वकर्मा ने अपनी याचिका में सवाल उठाया था कि विश्वनाथ होतगी, हरीश चंद्र गुप्ता, उत्तम शर्मा, राजेंद्र प्रसाद राय और पदम प्रिया बालकृष्णन को वर्किंग प्लान से क्यों छूट दी गई है? कैट ने राज्य शासन से विश्वकर्मा द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब देने के आदेश देते हुए उनके आवेदन का निराकरण करने के लिए कहा था. राज्य शासन ने विश्वकर्मा के सवाल का जवाब तो नहीं दिया किंतु उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया. इस बात को लेकर विश्वकर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई. इस याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने  राज्य शासन को आदेशित किया है कि कैट के निर्णय आने तक याचिकाकर्ता विश्वकर्मा के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की जाए. विश्वकर्मा की याचिका पर 13 अक्टूबर को कैट में सुनवाई होनी है.

आरआर पर मेहरबानी क्यों?

वन विभाग ने आईएफएस अधिकारी देवाप्रसाद (आरआर ) को पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन का कार्य योजना बनाने के लिए पदस्थ किया है. इसके साथ ही देवा प्रसाद को पेट नेशनल पार्क का प्रभारी डायरेक्टर भी बनाया है. वर्किंग प्लान पदस्थापना आदेश से प्रभावित अधिकारियों का कहना है कि  जब देवा प्रसाद को 90 किलोमीटर बफर जोन का वर्किंग प्लान बनाने के साथ-साथ पेंच नेशनल पार्क का डायरेक्टर बनाया जा सकता है तो हमें क्यों दूसरा प्रभार दिया गया. एक सीनियर अधिकारी का कहना यह भी था कि देवाप्रसाद की पदस्थापना छतरपुर में किया जाना चाहिए था जहां टीकमगढ़ का वर्किंग प्लान ड्यू है.