भोपाल: अगले 2 दिन तक वन विहार का संचालन भगवान भरोसे रहेगा. वन विहार के संचालक हरीश गुप्ता करोना से पीड़ित हैं. सरकार के कोप भाजन के शिकार स्थानांतरित सहायक संचालक अनिल कुमार जैन को दबाव में भार मुक्त कर दिया गया.
उनकी जगह पर स्पेशल वाहन से सुनील कुमार सिन्हा को चार्ज लेने के लिए बुलाया गया. सिन्हा आए, चार्ज लिए और फिर कान्हा रवाना हो गए. शनिवार इतवार और सोमवार का दिन वन विहार का मैनेजमेंट भगवान भरोसे छोड़ दिया गया. पूर्व सीएम कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने भी जैन के तबादले को लेकर सवाल खड़े किए.
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सेवानिवृत्ति के 7 महीने पहले वन विहार में पदस्थ सहायक संचालक अनिल कुमार जैन का अचानक तबादला किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. यह सवाल इसलिए स्वाभाविक रूप से खड़े हो रहे हैं क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग के ही नियम है कि यह किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की सेवानिवृति के साल भर रह गए हैं तो उसका तबादला नहीं किया जा सकता.
इस नियम के बाद भी जैन का तबादला वन विहार भोपाल से कान्हा नेशनल पार्क मंडला कर दिया गया. इस जैन के स्थानांतरण आदेश से मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक काना-फूसी भी शुरू हो गई है. सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर वन विहार में सफारी संबंधित किस नौकरशाह के फरमान की नाफरमानी करने पर उनके तबादले किए गए.
जैन को बलपूर्वक किया भार मुक्त-
वन विहार के स्थानांतरित सहायक संचालक एके जैन से सरकार इतनी नाराज थी कि उन्हें बलपूर्वक भार मुक्त किया गया. कहीं स्थानांतरण के खिलाफ जैन कोर्ट से स्टे ना लेकर आ जाए, इस भय से शीर्ष अधिकारियों ने कान्हा में पदस्थ सुनील कुमार सिन्हा को स्पेशल वाहन से भोपाल बुलाया गया. वह शाम को वन विहार पहुंचे और चार्ज ग्रहण करते ही उसी वाहन से कान्हा के लिए रवाना हो गए. आज की तारीख में वन विहार में संचालक बीमार है और सहायक संचालक कान्हा पहुंच गए हैं.
कुछ अधिकारियों की किरकिरी बन गए थे जैन-
स्थानांतरित वन विहार के संचालक जैन कुछ अधिकारियों की आंखों की किरकिरी बन गए थे. दरअसल, वन विहार के स्वरूप को परिवर्तित करने के लिए 4 करोड़ के टेंडर होने हैं. कस्बे अधिकारी चाहते थे कि यह टेंडर दो हिस्सों में हो ताकि उनके चहेते ठेकेदार को उपकृत कर सकें. ये अफसर इस कार्य के लिए पूर्व से अनुबंधित आकृति आर्किटेक्ट संजीव बम को हटवाने की कोशिश में हैं.