भोपाल: राज्य के श्रम विभाग के प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा ने सभी विभाग प्रमुखों एवं जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर कहा है कि आउटसोर्स पर रखे गये सभी कर्मियों को श्रम कनूनों के तहत लाभ दिया जाये। परिपत्र में कहा गया है कि वर्तमान में शासकीय विभागों, उपक्रमों तथा निगम और मंडलों में विभिन्न कार्यों हेतु जैसे सफाईकर्मी (हाउस कीपिंग), कम्प्यूटर आपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, चौकीदार, ड्रायवर, निर्माण, सुरक्षाकर्मी आदि के रूप में ठेका एवं आउटसोर्स पर श्रमिकों/कर्मचारियों को नियोजित किया जाता है। लेकिन, प्राय: यह देखने में आया हैं कि ऐसे ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों को विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है।
इसका मुख्य कारण यह है कि जिन ठेकेदारों और एजेंसियों के माध्यम से इन श्रमिकों/कर्मचारियों को नियोजित किया जाता है, उस विभाग द्वारा उन ठेकेदारों का पंजीयन लाइसेंस ठेका श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1970 के अंतर्गत प्राप्त करने हेतु प्रावधान का परिपालन नहीं कराया जाता है।
इस अधिनियम में पंजीयन/लाइसेंस प्राप्त करने पर संबंधित ठेकेदार की जानकारी श्रम विभाग को होने से विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों का परिपालन कराया जाना संभव हो जाता है। परिपत्र में कहा गया है कि विभिन्न श्रम अधिनियमों में कई प्रावधानों का परिपालन संबंधित नियोजक/ठेकेदार दवारा किया जाना आवश्यक है: एक, ठेका श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1970 अधिनियम के अनुसार 20 या 20 से अधिक ठेका श्रमिकों के नियोजन पर संबंधित विभाग/ उपक्रम/ निगम / मण्डल को अधिनियम में प्रमुख नियोजक के रूप में पंजीयन एवं ठेकेदार को लाइसेंस श्रम विभाग से लेना अनिवार्य है।
पंजीयन/लाइसेंस संबंधी संपूर्ण प्रक्रिया तथा प्रपत्र आदि की जानकारी श्रम विभागीय पोर्टल पर दर्शित है। दो, ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों को ठेका श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1970, भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार ( नियोजन का तिनियमन एवं सेवा शर्ते) अधिनियम, 1996, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948, नेतन भुगतान अधिनियम, 1936 एवं बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 आदि में वर्णित पावधानों का लाभ मिलना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
इन श्रमिकों/कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, नियत समय पर वेतन का भुगतान, यदि ओवरटाइम कार्य किया गया है तो ओवरटाइम का भुगतान, बोनस राशि का भुगतान, पीएफ राशि तथा ईएसआईसी के अंशदान का भुगतान करते हुए इन योजनाओं का लाभ तथा ग्रेच्युटी, साप्ताहिक अवकाश आदि अन्य वैधानिक सुविधायें प्राप्त होना आवश्यक है।
तीन, वर्तमान में न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत 01 अप्रैल 2023 से 30 अक्टूबर 2023 तक मजदूरी की दरें निर्धारित हैं जिसके अनुसार मजदूरी दी जाये। परिपत्र में कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मियों को नियत समय पर पात्रतानुसार निर्धारित न्यूनत मजदूरी का भुगतान, बोनस राशि का भुगतान, ओवर टाइम का भुगतान एवं कर्मचारी भवि निधि, राज्य बीमा का अंशदान जमा हो व ग्रेच्युटी एवं अवकाश आदि समस्त सुविधा नियमानुसार प्राप्त हों।