ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर पंचायत एवम् नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है।
इस निर्देश के बाद मध्यप्रदेश में राजनीतिक हलचलें तेज हों गई है। ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर शिवराज और कमलनाथ आमने-सामने नज़र आये। कोर्ट के फ़ैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सबसे पहले बड़ी बैठक बुलाई, जिसमें पंचायत एवम् नगरीय निकाय के कई सीनियर अधिकारी मौजूद रहे।
राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि, नगरीय निकाय चुनाव कराने के लिए हम पूरी तरह से तैयार है। आज की तारीख में नगरीय निकाय चुनाव कराना आसान है क्योंकि इसके लिए आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन पंचायत चुनाव में अभी आरक्षण की प्रक्रिया बाकी है। इसी सिलसिले में आज पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। हम कोर्ट के आदेश के अनुसार, दोनों ही चुनाव हर हाल में जून तक करायेंगे।
बीपी सिंह ने एक अहम् जानकारी देते हुए बताया कि, 12 जून तक पहला चुनाव संपन्न होगा। उसके बाद दूसरा चुनाव 30 जून तक कराया जायेगा। जानकारी के अनुसार, सबसे पहले नगरीय और फ़िर पंचायती चुनाव कराए जा सकते है। चुनाव की तैयारियों के लिए कलेक्टर्स को भी निर्देश दिए जा चुके है। लेकिन अब सभी के मन में यह सवाल है कि, क्या ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव होंगे? ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कोर्ट के निर्देश के बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरें पर हमलावर हो रही है। दोनों ही पार्टियों ने आज ओबीसी वर्ग को चुनाव में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही है।
बीजेपी का बड़ा बयान-
बीजेपी की तरफ़ से प्रदेश अध्यक्ष वी.डी शर्मा ने कहा कि, मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ हों इसके लिए हम सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटिशन दायर करेंगे एवं पुनः आग्रह करेंगे कि स्थानीय निकाय चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ ही हों। साथ ही हम यह ऐलान करते है कि, चुनाव में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत से ज्यादा टिकट दिए जायेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना विदेश दौरा भी रद्द कर दिया है, जो पहले से तय था।
Rec. LIVE : प्रदेश अध्यक्ष श्री @vdsharmabjp की पत्रकार वार्ता।
— BJP MadhyaPradesh (@BJP4MP) May 11, 2022
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कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना-
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ़ से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि, हमें भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने 2 साल तक कोई प्रयास नहीं किये, कोई कानून नहीं लाये, संविधान में संशोधन हो सकता था कि ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ मिले लेकिन इन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की, इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तय किया कि आगामी निकाय चुनाव में हम 27% टिकट पिछड़े वर्ग को देंगे।
कांग्रेस पार्टी ने शिवराज सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि, अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत? शिवराज जी , जब आपके पास सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त समय था, तब तो आपकी सरकार ने कुछ किया नही, आधी- अधूरी रिपोर्ट व आधे-अधूरे आँकड़े पेश किये।
जिसके कारण ओबीसी वर्ग का हक़ मारा गया और प्रदेश में बग़ैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव का निर्णय सामने आया। अब आप भले अपनी विदेश यात्रा निरस्त करे या कुछ भी कहे लेकिन आपकी सरकार के नाकारापन का ख़ामियाज़ा तो ओबीसी वर्ग के नुक़सान के रूप में सामने आ ही चुका है। आपने जो ज़ख़्म दिये है, अब वो किसी भी दवा से ठीक होने वाले नही है। प्रदेश का ओबीसी वर्ग इस सच्चाई को जान चुका है, अब वो आपके किसी भी गुमराह करने वाले झाँसे में आने वाला नही है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह निर्देश-
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर पंचायत एवम् नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया गया है। इसलिए मध्य प्रदेश में पंचायत एवम् नगरीय निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के कराए जाने की संभावना है।