भोपाल: राज्य के वन विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य लघु वनोपज संघ ने वनोपजों के क्रय-विक्रय के लिये ऑनलाईन पोर्टल विकसित किया है। इसमें अभी के्रता एवं विक्रेताओं के विवरण डाले जा रहे हैं तथा जल्द इसका लोकार्पण किया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि लघु वनोपज संघ, लघु वनोपजों से बनाये प्रसंस्कृत उत्पाद विन्ध्य हर्बल ब्राण्ड के नाम से अमेजान, फिलपकार्ट, मीशो जैसे अंतराष्ट्रीय ऑनलाईन प्लेटफार्म पर विक्रय के लिये उपलब्ध कराता है परन्तु प्रदेश के विभिन्न जिलों में वनवासियों एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा लघुवनोपजों से प्रसंस्कृत उत्पादों के लिये कोई व्यवस्था नहीं थी।

इसलिये मुख्यमंत्री के निर्देश पर लघु वनोपज संघ ने बायर-सेलर का ऑनलाईन प्लेटफार्म अलग से विकसित किया है। इस ई-प्लेटफार्म के माध्यम से लघु वनोपजों एवं उसके प्रसंस्कृत उत्पादों का देश-विदेश में सीधे विक्रय हो सकेगा तथा इनका वनवासियों एवं ग्रामीणों को अच्छा मूल्य भी मिल सकेगा।

28 हजार क्विंटल महुआ संग्रहित हुआ-

लघु वनोपज संघ ने इस बार एमएसपी पर 28 हजार क्विंटल से ज्यादा महुआ का संग्रहण किया है। अब वह इनका विक्रय करेगा। इसमें उसे चार करोड़ रुपये का मुनाफा होने की संभावना है। पिछले तीन सालों में संघ ने महुआ का कोई संग्रहण नहीं किया था। ज्ञातव्य है कि महुआ का सर्वाधिक उपयोग शराब बनाने में ही होता है। इधर राज्य के वन विभाग ने तीन साल बाद अपने डिपो से लकडिय़ों की लक्ष्य से अधिक बिक्री की है।

बाजार में मांग कम होने एवं कोविड काल के कारण वह पिछले तीन सालों में अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया था। वर्ष 2018-19 में 1150 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुध्द 1116 करोड़ रुपये, वर्ष 2019-20 में 1500 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुध्द 1036 करोड़ रुपये, वर्ष 2020-21 में 1398 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुध्द 1294 करोड़ रुपये लकडिय़ों की नीलामी से प्राप्त किये गये थे जो लक्ष्य से कम थे। लेकिन वर्ष 2021-22 में 1425 करोड़ रुपये के लक्ष्य से ज्यादा 1442 करोड़ रुपये नीलामी से प्राप्त किये गये। अब वर्तमान वित्त वर्ष 2022-23 में लक्ष्य 1500 करोड़ रुपयों का रखा गया है।