बीजेपी के चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाने के बाद से ही राजस्थान में 450 रुपए में सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।  मंगलवार (19 दिसंबर को) संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ने इन सभी अफवाहों से इनकार कर दिया है। राज्यसभा में सरकार की ओर से कहा गया कि उसका राजस्थान में एलपीजी सिलेंडर 450 रुपये में उपलब्ध कराने का कोई इरादा नहीं है।

भारत सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही। राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार ने हाल ही में राजस्थान में 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की घोषणा की है?

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। दोनों सवालों के लिखित जवाब में पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने ऐसे किसी भी विज्ञापन से इनकार किया और कहा कि भारत सरकार की ओर से राजस्थान में 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने का कोई विज्ञापन नहीं दिया गया है।

अब सवाल यह है कि 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कहां से आ गई? दरअसल, हाल ही में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मेजरम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। राजस्थान में केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में पीएम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 450 रुपये में सिलेंडर देने का वादा किया।

मध्य प्रदेश में भी बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में 450 रुपये में सिलेंडर देने का वादा किया था। वहीं इन दोनों राज्यों के अलावा भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने में सफल रही है। इन तीन राज्यों में बीजेपी सरकार बनने के बाद से ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत देशभर में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर मिलेगा?

विधानसभा चुनाव में बीजेपी के चुनावी वादे की गूंज अब संसद में भी सुनाई दे रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बीजेपी 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने का वादा करके इन राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही है। इन दोनों राज्यों की भाजपा सरकारें इस वादे को कब तक पूरा करेंगी? हालाँकि, जिन योजनाओं और वादों के दम पर बीजेपी तीन राज्यों में सत्ता हासिल करने में सफल रही, उन्हें पूरा करना इतना आसान नहीं है क्योंकि इसमें कई विरोधाभास हैं।