उज्जैन में अभी हाल ही में महाकाल लोक के पहले चरण का लोकार्पण हुआ है। इसके बाद उज्जैन में महाकाल लोक के दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। दूसरे चरण के तहत किए जा रहे काम के दौरान जब 20 फीट तक की गहराई के गड्ढ़े खोदे गए तो इस दौरान यहां से 11 वीं शताब्दी के परमार कालीन प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिले हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी आज उज्जैन में मौजूद थे। इसी दौरान सीएम शिवराज ने मंदिर के खुदाई में मिले अवशेषों का भी अवलोकन किया। साथ ही उन्होंने महाकाल लोक परियोजना के द्वितीय चरण अंतर्गत लगभग 11.36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले के मेघदूत वन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर कई मंत्री और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बताया जा रहा है, कि संस्कृति विभाग ने अवशेषों का परीक्षण पुरातत्व संचालनालय के तकनीकी दल से करवाया है। 1234 ई. में महाकाल मंदिर इस दौरान मंदिर पर हुए आक्रमण के समय मंदिर ध्वस्त हुआ था। बाद में स्थानीय शासकों ने इसका पुनर्निर्माण कराया गया जिसके बाद 17वीं शताब्दी में इसे पुनः ध्वस्त कर दिया गया था।
इस मौके पर सीएम शिवराज ने कहा, कि मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए पुरातत्व संचालनालय ने मूल संरचना के अनुसार विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। तकनीकी विशेषज्ञों ने उपलब्ध वास्तुखंडों के आधार पर शिखर के कलश तक की ऊँचाई 37 फीट निर्धारित की है। मंदिर के पुनर्निर्माण से महाकाल मंदिर परिसर की भव्यता में वृद्धि होगी।