कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष और कमलनाथ के करीबी रहे नरेंद्र सलूजा की बीजेपी में एंट्री की स्क्रिप्ट 8 नवंबर को ही लिखी जा चुकी थी. बीजेपी ज्वाइन करते ही कांग्रेस मीडिया विभाग ने एक बयान जारी कर इस दावे को सही साबित कर दिया. बता दें कि वह इससे पहले भी पार्टी से दूरी बना चुके है. साथ ही उन पर सांठगांठ का भी आरोप लगाया गया है. तो आइये जानते हैं कैसे कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हुए सलूजा..!

इंदौर कार्यक्रम में शामिल हुए थे कमलनाथ-
इसी साल 8 नवंबर के दिन गुरु नानक जी के प्रकाश पर्व पर इंदौर के खालसा स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में कमलनाथ पहुंचे थे. उन्होंने वहां पर मत्था टेका और कार्यक्रम को संबोधित भी किया था. कमलनाथ के जाने के बाद देश के प्रसिद्ध कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी ने 1984 के सिख दंगों का जिक्र करते हुए कमलनाथ पर हमला बोला था.
उन्होंने कहा था कि यहां (कमलनाथ) एक ऐसे नेता का सम्मान हो रहा है, जिसने 1984 के सिख दंगों में टायर डालकर लोगों को जिस भीड़ ने जलाया, उसका नेतृत्व किया था. उसके बाद कानपुरी ने कीर्तन करने से मना कर दिया था और इंदौर में कदम नहीं रखने की बात भी कही थी. इस दौरान नरेंद्र सलूजा पूरे समय वहां पर मौजूद थे.
बीजेपी ज्वाइन से पहले ही कांग्रेस ने कर दिया था बाहर-
इस कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने बड़ा एक्शन लिया था लेकिन इसका ख़ुलासा 25 नवंबर के दिन नरेंद्र सलूजा के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद हुआ. दरअसल, कांग्रेस ने उन्हें पहले ही पार्टी से बाहर कर दिया था. मीडिया विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि नरेंद्र सलूजा लगातार दूसरी पार्टी के संपर्क में थे और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे. उनकी इन गतिविधियों की सूचना प्राप्त होने के बाद उन्हें 13 नवंबर को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था.

कांग्रेस ने सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि इंदौर में सिख कीर्तनकार के विवाद की साजिश भी नरेंद्र सलूजा ने ही रची थी. सलूजा का यह कृत्य जैसे ही पार्टी को पता चला, कमलनाथ ने इसकी जाँच के लिये एक कमेटी का गठन किया था. इस जांच कमेटी ने भी पूरे विवाद की साजिश नरेंद्र सलूजा द्वारा रचने की पुष्टि की है.
पहले भी सलूजा ने कांग्रेस से जताई थी नाराजगी-
इसके पहले जब एमपी कांग्रेस की मीडिया विभाग की टीम बनाई गई थी. उस समय केके मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया था, तब भी नाराजगी के चलते सलूजा ने अपने उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, बाद में कमलनाथ से बातचीत के बाद वे वापस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष का काम संभालने लगे थे.
बीजेपी ज्वाइन के बाद सलूजा का बड़ा बयान-
बीजेपी ज्वाइन करने के बाद नरेंद्र सलूजा ने कांग्रेस छोड़ने का सबसे बड़ा कारण 1984 के सीख दंगों को बताते हुए कहा कि 8 नवंबर को मैं उनके (कमलनाथ) साथ गुरु नानक जी के प्रकाश पर्व पर इंदौर के खालसा स्टेडियम में गया. उन्होंने वहां पर मत्था भी टेका. इसी बीच देश के प्रसिद्ध कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी, जिन पर सिखों की आस्था है और वे सबके प्रिय हैं, उन्होंने जो शब्द कहे, वे एक-एक शब्द आज तक मेरे कानों में गूंज रहे हैं. जिन्हें सुन दो-तीन दिन तक तो मैं सो नहीं पाया.
बता दें कि मनप्रीत सिंह कानपुरी ने आरोप लगया था कि सिख दंगों के समय टायर डालकर लोगों को जिस भीड़ ने जलाया, उसका नेतृत्व कमलनाथ ने किया था. उनके इस बयान का जिक्र करते हुए सलूजा बोले, उनके वे शब्द थे, जिसने मेरी आत्मा को झकझोर दिया. उसके बाद मैंने 8 नवंबर से कमलनाथ जी से पूरी तरह से दूरी बना ली. साथ ही कांग्रेस के लिए भी काम नहीं किया. उनके किसी भी कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुआ.
हर साल उनके जन्मदिन पर तलवार भेंट करता था. इस बार मैंने बधाई तक नहीं दी. मैं उस व्यक्ति के साथ नहीं रह सकता जो हमलों का दोषी हो, इसलिए ऐसे पद, व्यक्ति और पार्टी को ठोकर मार दी. मेरे लिए पहले धर्म-समाज है. इसलिए मैं बीजेपी से जुड़ा हूं' और पूरी ईमानदारी से आगे भी काम करूँगा.
सलूजा की एंट्री से 2023 की गूंज-
कांग्रेस ने अपने बयानों के ज़रिये ये साफ कर दिया है कि सलूजा को पार्टी ने पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था. लेकिन उन्होंने बीजेपी ज्वाइन करते समय इस बात जिक्र नहीं किया. फ़िलहाल दोनों ही तरफ से अपने-अपने तर्क दिए जा रहे हैं लेकिन भारत जोड़ो यात्रा की एमपी में एंट्री के साथ ही सलूजा के ज़रिये बीजेपी ने कांग्रेस को बड़ा झटका देने का काम किया हैं. अब देखना ये होगा कि सलूजा और यात्रा का असर विधानसभा चुनाव तक टिक पाता है या नहीं?