भोपाल: राज्य का महिला एवं बाल विकास विभाग बांछड़ा, बेडिय़ा एवं सांसी जनजातियों में प्रचलित देह व्यापार की प्रथा को रोकने के लिये सम्मान योजना लायेगा। दरअसल इन जनजातियों में देह व्यापार को सामाजिक मान्यता दी गई है परन्तु इसे विधिवत मान्यता नहीं है। इन जनतातियों की महिलायें विशेषकर लड़कियां इस परम्परागत देह व्यापार में न जायें, इसके लिये यह सम्मान योजना बनाई गई है।
प्रदेश में बांछड़ा जनजाति मंदसौर जिले में मल्हारगढ़, गरोठ, सीतामऊ, पलपुरा, सुवासरा एवं नीमच जिले में नीमच, मनासा, जावद तथा रतलाम जिले में जावरा, आलोट, सैलाना, पिपलौदा व बाजना में पाई जाति है जबकि बेडिय़ा जनजाति सागर जिले में पथरिया, विजावत एवं रायसेन व विदिशा जिले में पाई जाती है।
सांसी जनजाति बुरहानपुर एवं छतरपुर जिलों में पाई जाति है।सम्मान योजना के तहत, उन एनजीओ को आर्थिक सहायता दी जायेगी जो उक्त जनजातियों में देह व्यापार की प्रथा की रोकथाम करने, बचाव करने, पुनर्वास करने, आवश्यक सुविधायें व सहायता देने एवं अन्य सहयोगी गतिविधियां संचालित करेंगे।
उक्त योजना में देह व्यापार में आये बच्चों को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावास एवं बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में डाला जायेगा। दरअसल इन जनजातियों की देह व्यापार में संलग्र महिलाओं को पुनर्वास के लिये तीन जिलों छतरपुर, सागर एवं मुरैना में एनजीओ द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की जाबालि योजना के तहत आवासीय शिक्षा केंद्र खोले गये हैं जिनमें से मुरैना का केंद्र बंद हो गया है तथा विभाग ने शेष दो केंद्रों को जाबालि योजना के तहत आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है और इन केंद्रों को भी बंद करने का निर्णय लिया है।
हांलाकि छतरपुर की सत्यशोधन आश्रम की अधीक्षिका ने सीएम से जाबालि योजना जारी रखने का आग्रह किया है और केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने भी इस योजना को बंद न करने के संबंध में सीएम को पत्र लिखा है।