भोपाल: प्रदेश के श्रमायुक्त डा. वीरेन्द्र सिंह रावत ने सभी श्रमाधिकारियों को हिदायत जारी की है कि वे बिना अनुमति के कारखानों एवं संस्थानों का निरीक्षण नहीं करें तथा ऐसा करने पर उनपके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जायेगी।
इस संबंध में जारी हिदायत में कहा गया है कि कुछ श्रम कार्यालयों द्वारा निरीक्षण सीआईएस पोर्टल (सेन्ट्रलाईज्ड इन्स्पेक्शन सिस्टम पोर्टल) से जेनरेट किए बिना एवं मुख्यालय की अनुमति के बिना किये जा रहे हैं। इसलिये सीआईएस पोर्टल के माध्यम से ही निरीक्षण किये जायें। निरीक्षण उपरांत 48 घण्टे के भीतर समस्त निरीक्षण टीप पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाना है, लेकिन निर्धारित समय में निरीक्षण टीप अपलोड नहीं करने के कारण निरीक्षण रद्द हो रहे हैं। इसके अलावा, निरीक्षण उपरांत नियोजक पक्ष के विरूद्ध जारी किये जाने वाले नोटिस/पत्र कार्यालय प्रमुख के हस्ताक्षर के बिना जारी नहीं किये जा रहे हैं।
हिदायत में कहा गया है कि यह तथ्य सामने आया है कि जिस निरीक्षक को निरीक्षण हेतु संस्थान आवंटित होता है वह उस संस्थान में स्वयं के साथ अन्य निरीक्षकों को भी ले जाते हैं एवं निरीक्षण टीप भी अन्य निरीक्षकों से लिखवायी जाकर हस्ताक्षर केवल उस निरीक्षक के होते है जिसे संस्थान निरीक्षण हेतु आवंटित हुआ है, अर्थात निरीक्षण टीप को लिखने वाला निरीक्षक अलग एवं उस पर हस्ताक्षर करने वाला निरीक्षक अलग होता है।
यह एक गंभीर मामला है एवं घोर अनुशासनहीनता एवं मुख्यालय के आदेश/निर्देश की अवहेलना है। यदि कोई संस्थान ऐसे हैं, जिनके लिए किसी श्रम अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन/लाइसेंस जारी नहीं होते हैं, लेकिन प्रवर्तन कार्य की दृष्टि से उनमें निरीक्षण किए जाने आवश्यक हैं, तो वे केवल शिकायत आधारित ही होंगे एवं निरीक्षण हेतु कारण सहित प्रस्ताव प्राप्त होने पर मुख्यालय की अनुमति के उपरांत ही जिला कार्यालयों द्वारा निरीक्षण किए जायेंगे।
हिदायत में स्पष्ट रुप से कहा गया है कि निरीक्षण कार्य संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ संपादित किए जायें एवं निर्देशों का अक्षरश: पालन कड़ाई से किया जाये। यदि इसके पालन में किसी अधिकारी/निरीक्षक द्वारा लापरवाही की जाना समक्ष में आता है तो गंभीर रूप से कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।