चमचमाती सड़कें सरकार के विकास के दावों की पहचान होती हैं। आज़ादी के इन 75 वर्षों के बाद भी सरकारें पक्की सड़कों के ज़रिये गांवों को शहरों से जोड़ने की कवायद में जुटी हुई हैं। कई जगह पर अब तेज़ी से काम भी हो रहा है तो कही पर सड़कें चमचमाने भी लगी है।
वैसे एक कहावत काफ़ी मशहूर है कि ‘हर चमकती चीज सोना नहीं होती’ ठीक इसी तरह सरकार का मजबूत सड़क का वादा भी हमेशा खरा नहीं होता। मजबूती के दावों के साथ बनने वाली नई सड़कों की हालत कुछ भी यू है कि भारी वाहनों के बजाय डामर अब हाथ से निकलकर भ्रष्टाचार को उजाकर कर रहा हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के देवरिया में बनी नई सड़क एक दो दिन में ही हाथ से उखड़ना शुरू हो गई। योगीराज में देवरिया से वायरल होता ये वीडियो भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है। PWD के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से रुद्रपुर क्षेत्र के सवलियागंज एकौना मार्ग पर बनी नई सड़क मानो अब सोशल मीडिया पर कमज़ोर व्यवस्था का नया ठिकाना बन गई है। बता दें कि इससे पहले भी इसी तरह के कई वीडियोस अब तक अलग-अलग राज्यों से सामने आ चुके हैं।
जिस तरह दीमक हर चीज को खोखला कर देती है ठीक उसी तरह भ्रष्टाचार नामक दीमक ने भी सरकारी तंत्र को मानो पूरी तरह से खोखला कर दिया है। अगर लाखों रुपए की लागत से बनने वाली सड़के इसी तरह भ्रष्टाचार की भेट चढ़ती रहेगी तो फिर जनता आज़ादी के इन बीतें वर्षों की तरह ही आगे भी सरकारों की तरफ नजरें बिछाएं बैठी ही रहेगी।
एमपी की नई सड़कों का भी यहीं हाल-