भोपाल: विधायक जालम सिंह पटेल के सभापतित्व वाली विधानसभा की आश्वासन समिति ने राज्य सरकार के उस जवाब पर कोई टिप्पणी नहीं की है जिसमें कुपोषण पर श्वेत पत्र जारी करने का कोई औचित्य नहीं बताया है।
दरअसल 14 सितम्बर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (वर्तमान में भी मुख्यमंत्री हैं) ने निर्देश दिये थे कि प्रदेश में बच्चों में व्याप्त कुपोषण पर महिला एवं बाल विकास विभाग श्वेत पत्र जारी करे। उस समय 18 जुलाई 2017 को विधानसभा में सवाल लगाकर कांग्रेस के दो विधायकों डॉ. गोविन्द सिंह एवं रामनिवास रावत ने सीएम के इस निर्देश के बारे में जानकारी चाही जिस पर तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने अपने जवाब में आश्वासन दिया कि श्वेत पत्र तैयार किये जाने हेतु गठित समिति द्वारा बिन्दु निर्धारण की कार्यवाही की जायेगी।
लम्बे समय तक इस आश्वासन की पूर्ति के लिये विधानसभा की आश्वासन समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग से पूछताछ की। अब पांच साल बाद विभाग ने जवाब भेजा है कि प्रदेश में व्याप्त कुपनोषण की वास्तविक स्थिति पर तत्कालीन सरकार द्वारा श्वेत पत्र जारी करने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग में समिति गठित की गई थी। उक्त समिति द्वारा आज दिनांक तक श्वेत पत्र का प्रारुप प्रस्तुत नहीं गया है।
विभाग द्वारा मामले का परीक्षण करने के उपरान्त निर्णय लिया है कि अब श्वेत पत्र जारी करने का औचित्य नहीं है, इसलिये इस आश्वासन को विलोपित किया जाना उचित होगा। विभाग के इस जवाब पर आश्वासन समिति ने कोई टिप्पणी नहीं की है जिससे अब यह आश्वासन बिना कार्यवाही के खत्म हो गया है। आश्वासन समिति की हाल ही में विधानसभा के पटल पर पेश तीसरी रिपोर्ट में उक्त जानकारी दी गई है।