भोपाल: राज्य शासन के जल संसाधन विभाग ने फस्र्ट स्प्रिंग सेंसस करने में अत्यधिक समय लगा दिया है तथा इसका डाटा कई महिने बीत जाने के बाद भी नहीं दिया है। इस पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जाहिर की है तथा अब जल संसाधन विभाग के ईएनसी वीके देवड़ा ने इसे खेद का विषय बताते हुये अपने सभी मैदानी मुख्य अभियंताओं को कड़ा पत्र लिखते हुये 31 मई 2026 तक स्प्रिंग सेंसस करने के निर्देश जारी किये हैं। 

उल्लेखनीय है कि स्प्रिंग सेंसस झरनों की गणना, प्राकृतिक जल स्रोतों (जैसे पहाड़ों और जंगलों में पाए जाने वाले प्राकृतिक झरनों) की गिनती और उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य इन महत्वपूर्ण जल स्रोतों का सटीक डेटाबेस तैयार करना है। 

तेजी से हो रहे शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्राकृतिक झरने सूख रहे हैं या मौसमी हो गए हैं। इस गणना के माध्यम से इन झरनों के संरक्षण और पुनरुद्धार की योजना बनाई जाती है। सेंसस की प्रक्रिया में झरनों की सटीक लोकेशन, उनका बहाव, पानी की गुणवत्ता और उनसे जुड़े सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का रिकॉर्ड रखा जाता है। सेंसस की यह प्रक्रिया पेपरलेस है। इसके लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुडक़ी द्वारा विशेष रूप से फस्र्ट स्प्रिंग सेंसस मोबाइल ऐप विकसित किया गया है।