भोपाल: जंगल महकमे में हर वित्तीय वर्ष में ₹70-80 करोड़ रुपए की बारबेड वायर खरीदी होती है. यह खरीदी अनुसंधान एवं विस्तार, कैंपा और विकास मद से की जाती है. इस खरीदी में 20 से 30 पर्सेंट कमीशन बाजी का खेल चल रहा है.
इस खेल को रोकने के लिए वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए. उन्हीं के गृह क्षेत्र खंडवा में बारबेड वायर खरीदी में गड़बड़ी की शिकायतें मिली है. खंडवा वन मंडल में 38% अधिक दर पर बारबेड वायर की खरीदी से शासन को राजस्व क्षति पहुंची है.
खंडवा वन मंडल में 97.94 रुपए किलोग्राम की दर से बारबेड वायर प्रदाय करने वाली फर्म से खरीदी न कर 123.90 रुपए किलोग्राम की दर पर खरीदी की गई. खंडवा वन मंडल ने ओपन टेंडर बुलाए थे, जिसमें शर्त थी कि आईएसआई मार्क की बारबेड वायर होना चाहिए.

खंडवा की ही फर्म क्वालिटी इंटरप्राइजेज खंडवा ने शर्त के मुताबिक ही आईएसआई मार्क की बारबेड वायर 97.94 रुपए किलो की दर से सप्लाई करने की निविदा दी. खंडवा डीएफओ ने अपने चहेते फर्म को लाभ पहुंचाने की मंशा से आईएसआई मार्क की बारबेड वायर प्रदाय करने वाली फर्म को आर्डर न देकर 104 रुपए प्रति किलो बारबेड वायर (बिना आईएसआई मार्क) की दर से खंडवा की फर्म से खरीदने का ऑर्डर दे दिया.
खंडवा डीएफओ के इस कार्यादेश से वन विभाग को 31% राजस्व हानि होने का अनुमान है. इस संबंध में डीएफओ खंडवा देवांशु शेखर का कहना है कि 'पूर्व में किए गए टेंडर को निरस्त कर दिया था, क्योंकि शासन ने कुछ और पैमाना अलग से जोड़ दिया था. दूसरी बार जेम(GEM) से टेंडर किया उसकी उसका दर 104 रुपए आया है.'
इससे तो यह भी स्पष्ट हो गया है कि फॉरेस्ट ऑफिसर जेम (GEM) के जरिए अधिक कीमत पर बारबेड वायर की खरीदी कर रहे हैं.सूत्रों ने बताया कि पूरे प्रदेश में बारबेड वायर और चेनलिंक की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का धंधा चल रहा है. इस धंधे में शामिल फर्म के कुछ संचालक नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि सभी वन मंडलों में 30 से 40% राशि का बंदरबांट कमीशन बाजी के नाम पर किया जा रहा है.
ब्लैक लिस्ट फर्म अफसरों के साथ मिलकर कर रहें धंधा-
कटनी डीएफओ गौरव शर्मा ने वर्क आर्डर लेने के बाद भी बारबेड वायर निर्धारित समय पर सप्लाई नहीं करने पर मैसर्स नवकार ग्रेनाइट मंदसौर फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. कटनी वन मंडल से मेसर्स नवकार ग्रेनाइट को वित्तीय वर्ष 22,-23 में वृक्षारोपण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए 27578 किलोग्राम बारबेड वायर कार्य आदेश जारी किया. मंदसौर की इस फर्म ने अब तक केवल 20832 किलोग्राम ही प्रदाय कर पाई है.
शेष बारबेड वायर की सप्लाई नहीं करने पर डीएफओ कटनी ने कई नोटिस जारी किए किंतु एक का भी जवाब नहीं दिया. जब उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया तब फर्म के डायरेक्टर कपिल नाहटा ने सीसीएफ जबलपुर के समक्ष अपील की है. नाहटा का कहना है कि परिवहन की सुविधा नहीं मिलने के कारण नहीं कर पाए थे.
इसी तरह से उत्तर सिवनी वन मंडल की डीएफओ वासु कनौजिया ने पारस ट्रेडर्स शारदा सदन सीहोर को ब्लैक लिस्ट कर दिया है. पारस ट्रेडर्स ने कार्य आदेश तो ले लिया किंतु डेढ़ साल बाद भी बारबेड वायर की सप्लाई नहीं कर पाए हैं. इस संबंध में डीएफओ का कहना यह है कि उन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए किंतु नोटिस का जवाब आज तक नहीं दिया है.
ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा-
वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं. इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए.
वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए.