भोपाल. जंगल महकमे में सर्किल और वन मंडलों में पदस्थ आईएफएस अफसर मैनेजमेंट फार्मूले के तहत मैदानी कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं. ये स्थानांतरण कार्य- आवंटन के नाम पर होता हैं.

मामला उजागर होने पर विभाग नोटिस तो जारी करता है किंतु सख्त कार्यवाही नहीं करता. हरदा डीएफओ नरेश दोहरे इसके अपवाद रहे हैं, क्योंकि 4 महीने पहले उन्हें निलंबित इसी आधार पर किया गया है. हाल ही में उत्तर बालाघाट के डीएफओ अभिनव पल्लव अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का नोटिस जारी किया गया है.

वन विभाग में स्थानांतरण नीति की कंडिका 12.3 मैं स्पष्ट प्रावधान है कि प्रभारी मंत्री अथवा कलेक्टर के अनुमोदन के साथ ही सर्किल अथवा वन मंडलों में कार्य आवंटन के लिए डिप्टी रेंजर से लेकर बीट गार्ड तक के तबादले करने का अधिकार मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक और डीएफओ को अधिकार दिए गए हैं.

वन विभाग में प्रभारी मंत्री अथवा मुख्यालय सतपुड़ा के अनुमोदन के अनुमोदन बिना ही सर्किल और वन मंडलों में कार्य विभाजन के नाम पर मैनेजमेंट के आधार पर तबादले का खेल चल रहा है. पिछले दिनों बैतूल सर्किल के पश्चिम बैतूल वन मंडल, दक्षिण बैतूल वन मंडल और होशंगाबाद वन मंडल में जिला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन लिए बिना ही  कार्य आवंटन के नाम पर मैदानी अमले को इधर-उधर किया गया.

सूत्रों की माने तो यह सिलसिला 2 दर्जन से अधिक वन मण्डलों चला है. दिलचस्प पहलू यह है कि सर्किल और वन मंडलों में तबादले का खेल साल भर चलता है.

अभिनव पल्लव पर होगी कार्रवाई, बृजेंद्र को नोटिस-

उत्तर वन मंडल बालाघाट में पदस्थ डीएफओ अभिनव पल्लव के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के नियम 10 के अंतर्गत कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है. इन पर आरोप है कि जब वे 2019-20 में ग्वालियर में पदस्थ थे तब इन्होंने 83 कर्मचारियों की कार्य आवंटन के नाम पर तबादले किए थे.

इन से स्पष्टीकरण मांगा गया था. स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने के बाद अभिनव फलों के खिलाफ कार्यवाही का निर्णय लिया गया. दिलचस्प पहलू यह भी है कि ग्वालियर में ही पदस्थ बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ भी कार्य विभाजन के नाम पर स्थानांतरण किए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

वन विभाग में दोहरा मापदंड-

जंगल महकमे में कार्रवाई करने की एकरूपता नहीं है. शीर्षस्थ अधिकारी कार्य विभाजन के नाम पर तबादले का खेल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में दोहरा मापदंड अपना रहे हैं. मसलन, कार्य आवंटन के नाम पर तबादला करने पर ही 4 महीने पहले इसी आधार पर हरदा डीएफओ नरेश दोहर को निलंबित कर दिया गया था.

जबकि हाल ही में उत्तर बालाघाट पदस्थ अभिनव पल्लव और ग्वालियर में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया. इसके पहले बेतूल में पदस्थ रहे एपीसीसीए मोहन मीणा ने भी 100 से अधिक तबादले किए थे. विधानसभा में मामला उठने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई.