मप्र कल देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा,जहां मेडिकल शिक्षा हिंदी में भी दी जाएगी। यह यूक्रेन, रूस, जापान, चीन किर्गिजस्तान और फिलीपींस जैसे देशों की तरह होगा जहां मातृभाषा में मेडिकल की पढ़ाई कराई जाती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर शनिवार को जिलों में हिंदी स्नेह सम्मेलन हो रहे हैं। वहीं CM चौहान खुद शाम को साढ़े पांच बजे राजधानी में रोशनपुरा चौराहे पर 'हिंदी का दीप' प्रज्वलित करेंगे, वे पहले ही कह चुके हैं यह गुलामी से मुक्ति की शुरुआत है।

ज्ञात हो कि हिंदी पाठ्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कर रहे हैं। इसका भोपाल के लाल परेड मैदान पर बड़ा कार्यक्रम होगा,इसमें करीब पचास हजार छात्रों की मौजूदगी भी संभावित है। मुख्यमंत्री आज भारत भवन में 'हिंदी विमर्श' में भी शामिल हैं। यह आयोजन मेडिकल समेत अन्य क्षेत्रों में भी हिंदी शिक्षा पर विचार के लिये हो रहा है। इसमें कई प्रबुद्ध व हिंदी प्रेमी मौजूद हैं।इसके बाद व गांधी मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी का अवलोकन करने भी पहुचेंगे। 

हिंदी में भी रहेगी स्पाइन ताकि भ्रम न रहे छात्रों को

इन किताबों को इस प्रकार अनुवादित कर तैयार किया गया है, जिसमें शब्द के मायने हिन्दी में ऐसे न बदल जाए कि उसे समझना मुश्किल लगे। जैसे- 'स्पाइन' को सभी समझते हैं, उसे हिन्दी अनुवाद में 'मेरुदंड' नहीं लिखा गया, बल्कि किताबों को ऐसे अनुवाद में तैयार किया गया है, जिसे ग्रामीण क्षेत्र से हिन्दी में पढ़ाई कर MBBS में दाखिला लेने वाले छात्र आसानी से पढ़ और समझ सकें। MBBS फर्स्ट ईयर की 3 किताब बायोकेमिस्ट्री, फिजियोलॉजी और एनाटॉमी को देवनागरी लिपि में तैयार किया। जिनके हिन्दी में शब्द उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें देवनागरी में लिखा है।