भोपाल: जंगल महकमे में सर्किल और वन मंडलों को मिलाकर 10 आईएफएस के पद रिक्त पड़े हैं. इसी प्रकार मुख्यालय में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद भी खाली पड़े हुए हैं. यह स्थिति इसलिए निर्मित हुई है, क्योंकि वन मंत्री विजय शाह और स्थानांतरित अशोक वर्णवाल के बीच पोस्टिंग को लेकर समन्वय नहीं बन पा रहा था.

अब एसीएस जेएन कंसोटिया के वन विभाग का कार्यभार संभालने के बाद अब आईएफएस अफसरों के तबादले की सूचियां बनने लगी. विभाग में चर्चा है कि शाह और कंसोटिया के बीच अच्छा समन्वय है, क्योंकि उन्हीं की सिफारिश पर ही कंसोटिया को वन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है.

विभाग के सर्किल रीवा, ग्वालियर, बालाघाट और पेंच नेशनल पार्क के डायरेक्टर के पद रिक्त हैं. ये सभी पद प्रभार में चल रहे हैं. ग्वालियर का प्रभार राजेश राय और बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी एपीएस सेंगर को दी गई है. दोनों ही अधिकारी वर्किंग प्लान बना रहे हैं. जबकि छिंदवाड़ा सीसीएफ का पद भी इस महीने खाली होने जा रहा है.

इसके अलावा अशोकनगर, राजगढ़, पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम मंडला, रतलाम और बड़वाह वन मंडल के पद भी खाली पड़े हुए हैं. इन सभी पदों को मैनेजमेंट और राजनीतिक रसूख के दम पर भरे जाने की कवायद चल रही है. यही वजह है कि सूचियां बन और बिगड़ भी रही है.

ग्वालियर सर्किल के लिए खंडवा वर्किंग प्लान में पदस्थ टीएस सूलिया और मुख्यालय में पदस्थ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा के बीच जोर आजमाइश चल रही है. दोनों ही अफसर वन मंत्री विजय शाह के चहेते माने जा रहे हैं. जबकि रीवा सर्किल में वर्किंग प्लान बनाने वाले वन संरक्षक राजेश राय को भी पदस्थ किये जाने की संभावना है.

राय भी शाह की गुडबुक में है. यह बात अलग है कि राय को रीवा में पदस्थ करने की चर्चा के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा पूर्व वन मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अपनी आपत्ति से वन मंत्री को भी अवगत करा दिया है. 

डीएफओ की पदस्थापना में भी उलटफेर की संभावना- 

अतिक्रमण के मामले में अतिसंवेदनशील वन मंडल प्रदीप मिश्रा को अवैध उत्खनन के लिए कुख्यात शिवपुरी वन मंडल में पदस्थ किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है. मौजूदा डीएफओ शिवपुरी मीना मिश्रा को दक्षिण बालाघाट में पदस्थ किया जा रहा है. दक्षिण बालाघाट में पदस्थ गिरजेश वरकडे को बुरहानपुर, एए अंसारी डीएफओ अनूपपुर को नौरादेही सेंचुरी और डीएफओ सुधांशु यादव को नौरादेही सेंचुरी से रायसेन पदस्थ किए जाने की संभावना है.

हरदा उत्पादन डीएफओ सुशील प्रजापति को छिंदवाड़ा पश्चिम वन मंडल में पदस्थ किए जाने की संभावना है. तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल के रहते हुए अब्दुल्लागंज डीएफओ विजय कुमार को हटाने में असफल रहे विजय शाह अब उन्हें स्थानांतरित करने का मन बना चुके हैं. जबकि विजय कुमार की वर्किंग से सभी आला अफसर संतुष्ट नजर आते हैं. वल्लभ भवन में पदस्थ छतरपुर के विवादित अफसर अनुराग कुमार अब मैदानी पोस्टिंग के लिए गणेश परिक्रमा कर रहे हैं.

मुख्यालय में भी पदस्थ हैं एपीसीसीएफ के पद-

मुख्यालय सतपुड़ा में एपीसीसीएफ के विकास, भू-अभिलेख, समन्वय, वित्त एवं बजट, शिकायत एवं सतर्कता और संयुक्त वन प्रबंधन शाखा के पद रिक्त पड़े हैं. जबकि एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल कैडर विरुद्ध उज्जैन सर्किल में पदेन वन संरक्षक के पद पर कार्य कर रहे हैं.

पिछले दिनों अग्रवाल उज्जैन सर्किल में बने रहने के लिए वनमंत्री विजय शाह से मुलाकात करने खंडवा की परिक्रमा कर आएं हैं. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की कमी के कारण वन बन प्रमुख आरके गुप्ता ने एक-एक अक्षर को कई शाखाओं का प्रभार दिया गया है.

विभाग का विकास शाखा सबसे महत्वपूर्ण है. इसका प्रभाव यूके सुबुद्धि को दिया गया है. वर्तमान में सुबुद्धि की पूर्णकालिक पदस्थापना सीईओ बांस मिशन के पद पर है. जबकि उनकी योग्यता को देखते हुए गुप्ता ने विकास और संयुक्त वन प्रबंधन का दायित्व भी दे रखा है.

सुबुद्धि को महत्वपूर्ण शाखाओं का अतिरिक्त बाहर मिलने से उनके बिरादरी के अफसरों में नाराजगी भी है. इसी प्रकार अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्पादन में पदस्थ आलोक दास को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है. कार की अधिकता के कारण उनमें चिड़चिड़ापन आने लगा है और उनकी शाखा के कर्मचारी उनके व्यवहार को लेकर परेशान रहते हैं.