भोपाल: राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड विक्रेताओं से माल या सेवा लेना वाले क्रेताओं को दी जाने वाली पुरुस्कार के प्रावधान चार साल बाद बदल दिये हैं।
दरअसल विभाग ने चार साल पहले 1 अक्टूबर 2018 को राजस्व संग्रहण में योगदान हेतु मालों की खरीदी अथवा माल और सेवाओं की प्राप्ति के लिये क्रेताओं/उपभोक्ताओं को प्राप्त होने वाले बिल/बीजकों के संग्रहण एवं पुरुस्कार हेतु मप्र बिल संग्रहण एवं पुरुस्कार योजना जारी की थी।
इसमें प्रावधान था कि प्रथम पुरुस्कार हेतु 5 क्रेताओं का चयन किया जायेगा एवं प्रत्येक चयनित क्रेता को 10 हजार रुपये की राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जायेगी जबकि द्वितीय पुरुस्कार हेतु 10 क्रेताओं का चयन कर प्रत्येक को 5 हजार रुपये एवं तृतीय पुरुस्कार हेतु 15 क्रेताओं का चयन कर प्रत्येक को 3 हजार रुपये की राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जायेगी।
लेकिन अब इस योजना में बदलाव कर दिया गया है तथा पुरुस्कार हेतु प्रत्येक छह माह में संग्रहित हुये बिलों की चार श्रेणियां बना दी गई हैं। इसमें प्रथम श्रेणी के अंतर्गत बिल की राशि 200 रुपये से 20 हजार रुपये रखी गई है जिसमें लॉटरी सिस्टम से तीन क्रेताओं का चयन कर प्रत्येक को बिल की 25 प्रतिशत राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जायेगी। द्वितीय श्रेणी के अंतर्गत बिल की राशि 20 हजार एक रुपये से 50 हजार रुपये तक होने पर तीन क्रेताओं का चयन कर उन्हें बिल की 20 प्रतिशत राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जायेगी।
तृतीय श्रेणी के अंतर्गत बिल की राशि 50 हजार एक रुपये से एक लाख रुपये तक होने पर तीन क्रेताओं का चयन कर उन्हें बिल की 15 प्रतिशत राशि पुरुस्कार स्वरुप दी जायेगी जबकि चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत बिल की राशि एक लाख रुपये से अधिक होने पर भी तीन क्रेताओं का चयन कर उन्हें बिल की दस प्रतिशत राशि अथवा 20 हजार रुपये जो भी कम हो पुरुस्कार स्वरुप दिया जायेगा।
ज्ञातव्य है कि पहले तीन माह के संग्रहित बिलों पर यह पुरुस्कार दिया जाता था जिसे अब छह माह के बिल कर दिया गया है। इन बिलों को पन्द्रह दिन के अंदर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करना होता है।
इस योजना में करमुक्त मालों एवं सेवाओं से संबंधित बिलों को शामिल नहीं किया गया है तथा पैट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी एवं मदिरा के बिलों को भी शामिल नहीं किया गया है।