भोपाल: वर्ष 2023 वन्य प्राणियों के लिए शुभ नहीं रहा है। आने वाला नया साल टाइगर स्टेट में बाघ की मौत न हो और चीता के वंश में वृद्धि हो, ऐसी कामनाएं हम सबकी है। बीत रहे 2023 का साल जंगल महक में प्रशासनिक अराजकता के लिए भी याद किया जाएगा। कहीं सीसीएफ और सीएफ के बीच विवाद सुर्खियों में रहे तो कहीं डिप्टी रेंजर के वीडियो ने तो विभाग में पावर ऑफ पैसे के दम पर हो रही प्रशासनिक जमावट की कलई खोल दी।
कुपोषण के लिए चर्चित श्योपुर के कुनो नेशनल पार्क में केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट चीता को इस मंशा के साथ क्रियान्यवन कराया था कि चीता बाड़े से निकल कर खुले जंगल में विचरण करे। देश, विदेश और प्रदेश की पर्यटक कुनो में चीता को लम्बी छलांग भरते देखकर आनंदित हो। देश और विदेश की टूरिस्ट सर्किट में श्योपुर का नाम भी जुड़े और वहां रह रहे गरीब आदिवासियों को रोजगार मिले। केंद्र सरकार और राज्य के अफसर के बीच हुई अहं की लड़ाई में तब बड़ा झटका लगा जब एक के बाद 3 शावकों सहित 9 चीतों की मौत हो गई। मजबूरन उन्हें बारे में रखना पड़ रहा है। अभी तक पर्यटकों के लिए सफारी शुरू नहीं हो पाई है।
टाइगर स्टेट में इस साल गई 38 बाघों की जान
प्रदेश में बाघों के सर्वाधिक घनत्व के लिए प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 11 बाघों की मौत हुई है। कान्हा टाइगर रिजर्व में आठ, पन्ना टाइगर रिजर्व में पांच, सतपुड़ा में दो और पेंच में एक बाघ की मौत हुई है। इनमें पन्ना टाइगर रिजर्व की लकवाग्रस्त बाघिन पी-234 के 10 माह के दो शावक भी शामिल हैं, जिनका बीते माह नर बाघ ने शिकार कर लिया था। इस साल 15 दिसंबर तक देश में 168 बाघों ने जान गंवाई है। 2022 में 121 की मौत हुई थी। 34 की मौत मप्र में और सबसे अधिक नौ बाघों की मौत बांधवगढ़ में हुई थी। 2021 में 127 बाघों की मौत हुई थी, जिसमें 42 मप्र के थे।
प्रदेश में कहां कितने बाघ
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व - 165
- कान्हा टाइगर रिजर्व - 129
-पेंच टाइगर रिजर्व - 123
- पन्ना टाइगर रिजर्व - 64
-सतपुड़ा टाइगर रिजर्व - 62
-संजय दुबरी टाइगर रिजर्व - 20